पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच भारत में सरकार ने उज्जवला योजना के लाभार्थियों को करारा झटका दिया है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की है। अब योजना के लाभार्थियों को साल में केवल चार रियायती 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर ही मिलेंगे। इससे पहले यह संख्या नौ थी, जबकि योजना की शुरुआत में लाभार्थियों को 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर देने का प्रावधान था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस बारे में जानकारी दी।
उन्होंने सोमवार को बताया कि यह फैसला उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत वार्षिक गैस खपत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उनके अनुसार अधिकांश परिवारों की खपत चार सिलेंडरों के आसपास ही रहती है, इसलिए सब्सिडी को उसी के अनुरूप किया गया है।
2016 में शुरू की गई थी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) को मई 2016 में गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं के लिए शुरू किया गया था।इसके तहत लाभार्थियों को शुरू में प्रति वर्ष 12 रियायती 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर दिए जाते थे। बीते वर्ष ये रियायती कोटा घटाकर नौ सिलेंडर कर दिया गया था। जिसके बाद अब एक बार फिर इसमें कमी की गई है।
इतनी मिलती है सब्सिडी
सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडर 200 रुपये की विशेष सब्सिडी शुरू की थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया था। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है।सब्सिडी वाले कोटे में हालिया कटौती एलपीजी की कीमतों में वृद्धि के बाद हुई है।
सात जून को बढ़ाई गई थी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत पिछले तीन महीनों में दो बार बढ़ोतरी के साथ कुल 89 रुपये बढ़ गई है। हालिया बढ़ोतरी 7 जून को हुई थी,जिसके बाद खुदरा मूल्य 942 रुपये हो गया है। 300 रुपये की सब्सिडी को घटाने के बाद, पीएमयूवाई लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर के लिए 642 रुपये का भुगतान करना पड़ता है।
कीमतों में बढोतरी के पीछे सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में रसोई गैस की कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में कम हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े आपूर्ति संकट के कारण वैश्विक एलपीजी कीमतों में फरवरी से करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
खानूजा ने कहा कि फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुई बढ़ोतरी के चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई है।
भारत की एलपीजी आयात लागत सऊदी अरब के अनुबंध मूल्य (सीपी) से जुड़ी हुई है, जो ईंधन के लिए वैश्विक मानक है। होर्मुज जलडमरूमध्य से संबंधित व्यवधानों के कारण खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति कम होने के बाद से इस मानक में फरवरी से लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 2022 से अब तक 52,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की है। उन्होंने बताया कि कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, तेल कंपनियों को प्रति 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान हो रहा है।
