Budget 2026: देशभर में करोड़ों एफडी कराने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। अगामी आम बजट में एफडी पर उनको बड़ी राहत मिल सकती है। दरअसल, हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर के प्रतिनिधियों ने प्री-बजट कंसल्टेशन मुलाकात पूरी हुई है। इस मुलाकात के दौरान बैंकिंग इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स ने अगामी आम बजट 2026-27 में बैंकों में लिक्विडिटी बढ़ाने, कम्प्लायंस को आसान बनाने और क्रेडिट फ्लो को बेहतर बनाने के लिए कई सुधार प्रस्ताव पेश किए।
रिटेल इन्वेस्टर ज्यादा रिटर्न के लिए म्यूचुअल फंड की तरफ बढ़ रहे हैं, ऐसे में बैंकों ने कहा कि उन्हें CASA लेवल बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। इसलिए, बैंकिंग सेक्टर के प्रतिनिधियों ने करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट (CASA) रेश्यो पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता जताई। इस चुनौती से निपटने के लिए, BFSI डेलीगेशन ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और म्यूचुअल फंड के लिए एक जैसे टैक्स ट्रीटमेंट की मांग की, और कहा कि इससे बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा सेविंग्स वापस लाने में मदद मिलेगी।
FD निवेशकों को क्या मिल सकती है राहत?
बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का कहना है कि अभी 3 साल के लॉक इन के साथ म्यूचुअल फंड निवेशकों को टैक्स छूट मिलती है। ELSS फंड में निवेश 3 साल तक निवेश कर टैक्स छूट पा सकते हैं। वहीं, बैंक एफडी पर टैक्स छूट पाने के लिए 5 साल की अवधि जरूरी है। यानी 5 साल की एफडी पर ही टैक्स छूट मिलती है। इस असमानता को देखते हुए बजट में भी 3 साल की एफडी पर टैक्स छूट पाने का ऐलान किया जा सकता है।
इसके साथ ही एफडी के प्रति निवेशकों को आकर्षित करने के लिए टीडीएस की छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। मौजूदा समय में एफडी (फिक्स्ड डिपॉज़िट) ब्याज पर टीडीएस की दर 10% है, जो ₹40,000 से अधिक के वार्षिक ब्याज आय पर लागू होती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा ₹50,000 है। अगर पैन कार्ड जमा नहीं किया गया है, तो टीडीएस दर बढ़कर 20% हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर किसी वित्तीय वर्ष में FD पर अर्जित ब्याज 40,000 रुपये से अधिक है तो TDS काटा जाएगा। आय की सीमा को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है। यानी एफडी निवेशकों को 3 साल की एफडी पर टैक्स छूट और टीडीएसी कटौती की सीमा का लाभ एक साथ बजट में दिया जा सकता है।
