Gold-Silver Prices: वैश्विक बाजारों में बुधवार को सोने की कीमतों में तेज बढ़त देखने को मिल रही है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कुछ हद तक राहत मिलना रही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि उन्होंने ईरान पर बमबारी और हमलों को दो हफ्तों के लिए रोकने पर सहमति जताई है। इस खबर से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई, खासकर ऊर्जा कीमतों में संभावित उछाल को लेकर, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा था। स्पॉट गोल्ड की कीमत 2.3% बढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इससे पहले मंगलवार को भी इसमें 1.2% की बढ़त दर्ज की गई थी। वहीं, अमेरिका में जून डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% चढ़कर 4,840.20 डॉलर प्रति औंस हो गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 6.30% बढ़कर $76.52 प्रति औंस हो गई है। उधर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 2.75% बढ़कर यानी 4140 रुपये बढ़त के साथ 1,54,429 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 6.21% बढ़कर यानी 14378 रुपये तेजी के साथ 2,45,726 रुपये किलो हो गया। यह बढ़त दर्शाती है कि निवेशक अभी भी सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अमेरिका-ईरान बातचीत की नई पहल
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान की ओर से 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के लिए एक मजबूत आधार माना जा रहा है। इससे पहले अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी थी कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोल दे, नहीं तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। अब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बनने से बाजार में सकारात्मक संकेत मिले हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और नई उम्मीदें
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी अहम रही है। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए दो हफ्ते का समय देने का अनुरोध किया था, ताकि कूटनीतिक समाधान निकाला जा सके। ईरान की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल ने भी पुष्टि की है कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू होगी। हालांकि, ईरान ने यह भी साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि युद्ध पूरी तरह खत्म हो गया है।
विशेषज्ञों की राय और बाजार की चाल
धातु बाजार के विशेषज्ञ के मुताबिक यह बढ़त फिलहाल राहत की प्रतिक्रिया (relief rally) है और आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान समझौते का पालन करता है या नहीं। उन्होंने कहा कि सोने के लिए 4,930 डॉलर (200 दिन का मूविंग एवरेज) और 5,000 डॉलर महत्वपूर्ण स्तर होंगे। वहीं चांदी के लिए 80-81 डॉलर का स्तर अहम माना जा रहा है।
महंगाई और ब्याज दरों पर असर
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। सोना आमतौर पर महंगाई और अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो इसका आकर्षण कम हो जाता है क्योंकि यह कोई ब्याज नहीं देता।
अन्य धातुओं का हाल
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी तेजी आई। चांदी की कीमत 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस हो गई। प्लैटिनम 2.4% बढ़कर 2,004.95 डॉलर और पैलेडियम 2.1% बढ़कर 1,500 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। डलास फेडरल रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर वैश्विक तेल आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा आती है, तो अमेरिका में महंगाई दर 4% से ऊपर जा सकती है। अल्पकाल में यह और तेजी से बढ़ सकती है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
वैश्विक राजनीतिक घटनाओं और कूटनीतिक प्रयासों का असर सीधे तौर पर कमोडिटी बाजार पर पड़ रहा है। फिलहाल निवेशक सतर्क हैं और आगे की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, खासकर अमेरिका-ईरान वार्ता और फेडरल रिजर्व के फैसलों पर।
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