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Gold-Silver Crash: मार्च में 33% तक फिसले, 45 साल की सबसे बड़ी गिरावट, क्या खत्म हुआ सेफ हेवन दौर?

मार्च में सोना और चांदी में आई भारी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। दोनों धातुएं 20 से 33% तक टूट चुकी हैं। एक महीने के भीतर 45 साल में यह सबसे बड़ी गिरावट है, जिससे इनके सेफ हेवन एसेट होने की धारणा पर सवाल उठ रहे हैं।

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गोल्ड-सिल्वर में जारी है तबाही

मार्च महीने में सोना 20% से ज्यादा और चांदी करीब 33% तक टूट चुकी है। हालिया उच्च स्तरों से देखें तो गिरावट और भी गहरी है, जहां सोना करीब 24% और चांदी 40% से ज्यादा फिसल चुकी है। यह गिरावट 1980 के बाद की सबसे बड़ी मानी जा रही है और तकनीकी तौर पर दोनों धातुएं अब बियर फेज में प्रवेश कर चुकी हैं।

सेफ हेवन क्यों फेल हुआ

आमतौर पर जियोपॉलिटिकल तनाव के दौरान सोना-चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर उलट गई। अमेरिका-इजरायल और ईरान तनाव के बीच भी इनकी कीमतों में लगातार गिरावट दिखी। इसका कारण यह है कि निवेशकों ने सुरक्षित विकल्प के तौर पर बॉन्ड्स और डॉलर को प्राथमिकता दी।

बॉन्ड यील्ड बना सबसे बड़ा दबाव

ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने सोने की चमक फीकी कर दी है। अमेरिका का 10 साल का यील्ड 4.38% के आसपास पहुंच गया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और भारत जैसे देशों में भी यील्ड मल्टी-ईयर हाई पर हैं। चूंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंचे यील्ड के दौर में इसकी मांग घट जाती है।

महंगाई और सेंट्रल बैंक की नीति का असर

तेल और गैस की कीमतों में तेजी से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे सेंट्रल बैंकों के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो गया है। फेड, ECB और बैंक ऑफ इंग्लैंड के सख्त रुख ने संकेत दिया है कि दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यह सोने के लिए नकारात्मक संकेत है।

ग्लोबल बिकवाली और मार्जिन कॉल का दबाव

इक्विटी बाजारों में गिरावट के बीच निवेशकों को मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें सोना-चांदी बेचकर कैश जुटाना पड़ा। हाल के महीनों में अच्छा रिटर्न देने के कारण ये सबसे आसान बिकने वाले एसेट बने, जिससे गिरावट और तेज हुई।

टेक्निकल संकेत क्या कहते हैं

सोने के लिए $4100 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि इसके नीचे गिरावट $3800 तक जा सकती है। हालांकि, ओवरसोल्ड कंडीशन के चलते शॉर्ट टर्म में $4300-4350 तक उछाल संभव है। चांदी में गिरावट ज्यादा तेज रही है और $57-54 के स्तर अब अहम सपोर्ट जोन बन चुके हैं।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति

विशेषज्ञों की राय में इस गिरावट में घबराकर बिकवाली करने से बचना चाहिए। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह चरणबद्ध खरीद का मौका हो सकता है। पोर्टफोलियो में विविधता और अनुशासित एसेट एलोकेशन ही इस अस्थिरता में सबसे सुरक्षित रणनीति मानी जा रही है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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