एक समय था जब इंजीनियरिंग को देश का सबसे शानदार करियर ऑप्शन माना जाता था। 12वीं करने वाले 70 पर्सेंट छात्रों का सपना होता था बीटेक में एडमिशन। इसकी वजह थी सरकारी से लेकर प्राइवेट क्षेत्र तक में इंजीनियर्स की डिमांड। लेकिन अब इंजीनियरिंग एडमिशन के कुछ आंकड़े इस पूरी तस्वीर पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इंजीनियरिंग काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद 1 लाख 6 हजार 583 सीटें खाली रह गईं। इतना ही नहीं, 167 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 90 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली हैं और 23 कॉलेज ऐसे हैं, जहां दो राउंड की काउंसलिंग के बाद एक भी छात्र का दाखिला नहीं हुआ। अब सवाल सीधा है- क्या वाकई छात्रों का BTech और इंजीनियरिंग से मोहभंग हो रहा है? क्या इंजीनियरिंग का वह क्रेज, जिसे हमने पिछले दो दशकों में देखा, अब कम हो रहा है? या फिर कहानी कुछ और है?
422 कॉलेजों के राउंड-2 विश्लेषण में सिर्फ 7 संस्थानों ने अपनी 100 फीसदी सीटें भरी हैं, जबकि 44 कॉलेज ऐसे रहे जहां 90 फीसदी से ज्यादा सीटें भर पाई हैं। दूसरी ओर 167 कॉलेजों में 10 फीसदी से भी कम सीटें भरी हैं और 23 कॉलेज तो ऐसे हैं जहां एक भी सीट नहीं भरी है।
अब पिछले साल से तुलना करेंगे तो तस्वीर और दिलचस्प हो जाती है। 2025 में दूसरे राउंड के बाद 148 कॉलेजों में 10 फीसदी से कम सीटें भरी थीं और 22 कॉलेजों में शून्य एडमिशन हुआ था। 2026 में यह संख्या बढ़कर 167 और 23 हो गई है। वहीं 90 फीसदी से ज्यादा सीटें भरने वाले कॉलेजों की संख्या पिछले साल के 56 से घटकर इस साल 44 रह गई। तीसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद भी इंजीनियरिंग की 37,943 सीटें खाली हैं। मतलब साफ है कि ये सिर्फ एक साल की छोटी-मोटी हलचल नहीं है। आंकड़े यह दिखा रहे हैं कि इंजीनियरिंग कॉलेजों के बीच छात्रों की पसंद का अंतर बढ़ रहा है।
इसके पीछे वजह क्या है? चलिए जानते हैं। पहली वजह है इंजीनियरिंग सीटों की संख्या और छात्रों की वास्तविक मांग के बीच अंतर। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग संस्थान और सीटें बढ़ी हैं, लेकिन हर कॉलेज की गुणवत्ता, फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेसमेंट एक जैसे नहीं हैं। यही वजह है कि छात्र कुछ चुनिंदा कॉलेजों में ही एडमिशन पाना चाहते हैं।
दूसरी वजह है प्लेसमेंट। एक समय BTech का मतलब था कि डिग्री पूरी की और नौकरी मिल गई। लेकिन अब ऐसा नहीं है। कंपनियां सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि coding, AI, data science, cybersecurity, communication और दूसरी industry-ready skills भी देखती हैं। इसलिए छात्र यह सोचने लगे हैं कि अगर डिग्री के बाद भी अलग से skills और certifications करनी ही हैं, तो कॉलेज चुनने में समझदारी क्यों न बरती जाए।
तीसरी वजह है नई टेक्नोलॉजी और AI का असर। Artificial Intelligence ने नौकरी के बाजार को लेकर छात्रों की सोच बदली है। आज छात्र बीटेक की उन ब्रांच को चुन रहे हैं जिनकी भविष्य में तगड़ी डिमांड होगी। छात्र इस समय technology-oriented branches जैसे AI, रोबॉटिक्स, मशीन लर्निंग, स्पेस इंजीनियरिंग की मांग कर रहे हैं और ये ब्रांच अभी ज्यादातर कॉलेजों में नहीं हैं।
चौथी और शायद सबसे बड़ी वजह है- छात्र अब quantity नहीं, quality चुन रहे हैं। यानी पहले सवाल होता था BTech करना है या नहीं? अब सवाल है BTech कहां से करना है और किस ब्रांच से करना है? यही वजह है कि एक तरफ कुछ कॉलेजों में सीटें खाली हैं, तो दूसरी तरफ स्थापित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों में सीटें तेजी से भर रही हैं।
