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त्योहारों से ठीक पहले बदलेगा गोल्ड मार्केट का मूड! सितंबर में 15% घट सकता है सोने का आयात

Gold Imports: पीएम मोदी की सोने पर फिजूलखर्ची कम करने की अपील के बाद सितंबर में भारत का सोना आयात 15% घट सकता है। इससे त्योहारों पर ग्राहक नया सोना खरीदने के बजाय पुरानी ज्वैलरी एक्सचेंज करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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सोने पर ब्रेक! पीएम मोदी के 'मास्टरस्ट्रोक' से आयात में भारी गिरावट (तस्वीर-AI)

Gold Imports: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सितंबर के महीने में भारत में सोने के आयात (गोल्ड इंपोर्ट) में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) के बाद सोना भारत के सबसे बड़े आयातित सामानों में शामिल है। पीएम मोदी ने देशवासियों से सोने पर फिजूलखर्च से बचने और सतर्कता बरतने की अपील की थी। उनके इस बयान के बाद आने वाले त्योहारी सीजन से ठीक पहले ज्वैलरी बाजार में हलचल बढ़ गई है और कारोबारियों का मानना है कि इससे नए सोने की मांग में थोड़ी कमी आ सकती है।

आयात घटने के अनुमान और आर्थिक कारण

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि अगस्त महीने में देश में करीब 45 टन सोने का आयात हुआ था, जिसमें सितंबर के दौरान 15 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की जा सकती है। 1 सितंबर को प्रधानमंत्री ने लोगों से सोने पर संयम बरतने का आग्रह दोहराया था। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के आयात बिल और चालू खाता घाटे (करेंट अकाउंट घाटा) को कम करना है। इसके साथ ही सरकार का प्रयास है कि भारतीय परिवारों के पास पड़े करीब 31,000 टन निष्क्रिय सोने का एक हिस्सा बाजार में वापस उपयोग में लाया जा सके। ज्वैलरी कारोबारियों के अनुसार जब भारत अधिक मात्रा में सोना खरीदता है, तो देश से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा (डॉलर) बाहर जाती है। इससे व्यापार घाटा बढ़ता है और भारतीय रुपये पर दबाव बनता है। यही कारण है कि सरकार घरेलू स्तर पर सोने की खपत में कमी लाने की कोशिश कर रही है।

पुराने सोने के बदले नया जेवर खरीदने का रुझान बढ़ा

पीएम मोदी की अपील और सोने की उच्च कीमतों के कारण मुंबई के झवेरी बाजार समेत देशभर के ज्वैलरी बाजारों का गणित बदल रहा है। अब ग्राहक नया सोना खरीदने के बजाय पुरानी ज्वैलरी के बदले नए गहने (गोल्ड एक्सचेंज) बनवाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। कारोबारियों का अनुमान है कि जो पुराना सोना एक्सचेंज मॉडल वर्तमान में ज्वैलर्स के कुल बिजनेस का 45-50% हिस्सा है, वह इस त्योहारी सीजन में बढ़कर 60-70% तक पहुंच सकता है। सोने की ऊंची दरों और अनिश्चितता के माहौल में लोग अपनी नकदी बचाकर रखना चाहते हैं। हालांकि भारतीय संस्कृति में त्योहारों और शादियों के दौरान गहने खरीदने की पुरानी परंपरा रही है। उद्योग एक्सपर्ट्स का मानना है कि गोल्ड एक्सचेंज के इस तरीके से ग्राहक त्योहार भी मना सकेंगे और नया खर्च किए बिना अपनी पसंद के नए डिजाइन के जेवर भी पा सकेंगे। इससे ज्वैलरी की मांग भी बाजार में बनी रहेगी।

ग्लोबल मार्केट का असर और सोने की कीमतें

सोने के बाजार पर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का भी बड़ा असर दिख रहा है। अमरीकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं से अमरीकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत हुए हैं। दूसरी ओर अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता फिर बढ़ गई है। हाल ही में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी भी देखी गई। एक्सपर्ट्स के अनुसार आने वाले दिनों में अमरीका के श्रम और मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़े सोने की चाल तय करेंगे। फिलहाल सर्राफा बाजार में सोने के भाव में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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