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भारत ने बताया क्यों किया ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव का समर्थन, UNGA में 164-1 से पारित हुआ विश्व का नया मानचित्र, केवल US खिलाफ

UNGA में भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने कहा, 'हमारा मानना है कि इस प्रस्ताव को समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रक्षेपणों के व्यापक उपयोग और उन पर विचार करने के समर्थन के रूप में समझा जाना चाहिए, न कि इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन या किसी अन्य विशेष मानचित्र प्रक्षेपण के समर्थन के रूप में।

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UNGA में भारतीय राजनयिक रघु पुरी।

Correct the Map : विश्व का मौजूदा एवं पारंपरिक मानचित्र बदलने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मतदान किया है। मानचित्र में बदलाव करने वाला प्रस्ताव 64-1 के भारी बहुमत से पारित हो गया है। प्रस्ताव के समर्थन में भारत ने भी मतदान किया है। खास बात यह है कि नए मानचित्र का आकार पारंपरिक रूप वाले मैप से बदला हुआ नजर आएगा। नए मानचित्र में अफ्रीका का आकार बढ़ा हुआ जबकि उत्तर अमेरिका एवं यूरोप का भौगोलिक क्षेत्र कम दिखेगा।

टोगो ने पेश किया प्रस्ताव, AU ने किया समर्थन

'करेक्ट द मैप' वाले इस प्रस्ताव को टोगो ने पेश किया था और इसका समर्थन अफ्रीकी यूनियन (AU) के देशों ने किया। खास बात यह है कि इस प्रस्ताव का विरोध केवल अमेरिका ने किया। अमेरिका के सहयोगी दे ब्रिटेन एवं फ्रांस ने भी नए मैप के पक्ष में मतदान किया जबकि छह देश मतदान से अनुपस्थित रहे। 'करेक्ट द मैप' वाले इस प्रस्ताव का समर्थन करने को लेकर भारत ने अपना रुख दुनिया के सामने रखा है।

मानचित्रों में भूमि के आकार पर दूर होगा भ्रम-भारत

UNGA में भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने कहा, 'हमारा मानना है कि इस प्रस्ताव को समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रक्षेपणों के व्यापक उपयोग और उन पर विचार करने के समर्थन के रूप में समझा जाना चाहिए, न कि इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन या किसी अन्य विशेष मानचित्र प्रक्षेपण के समर्थन के रूप में। इससे उन मानचित्रों में भूमि के आकार को लेकर पैदा होने वाली विकृतियों को दूर करने में मदद मिल सकती है, जो मुख्य रूप से आकार, दिशा या दूरी जैसी अन्य भौगोलिक विशेषताओं को सही बनाए रखने के लिए तैयार किए जाते हैं।'

'इसलिए इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया'

पुरी ने आगे कहा कि हमारा मानना है कि यह महत्वपूर्ण है कि प्रस्ताव तकनीकी और पद्धतिगत रूप से तटस्थ बना रहे। हमारा प्रतिनिधिमंडल उस भाषा का समर्थन करता है, जो सटीक मानचित्रण को प्रोत्साहित करती है और साथ ही देशों, संस्थानों तथा मानचित्रकारों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार सबसे उपयुक्त प्रक्षेपण चुनने की स्वतंत्रता देती है। इसलिए, भारत का रुख उस सिद्धांत तक सीमित है, जिसमें महाद्वीपीय भू-भाग के सापेक्ष आकार को संरक्षित करना उद्देश्य होने पर समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रक्षेपणों को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है। इस तरह का दृष्टिकोण प्रस्ताव के उद्देश्य को बनाए रखेगा और साथ ही किसी एक विशेष मानचित्रण पद्धति को अनावश्यक प्राथमिकता देने या किसी खास प्रक्षेपण, जिसमें इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन भी शामिल है, का समर्थन करने से बचाएगा। इसीलिए भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है।

देशों के आकार का सही चित्रण नहीं करता मर्केटर मानचित्र

बता दें कि मर्केटर मानचित्र को 1569 में फ्लेमिश मानचित्रकार जेरार्डस मर्केटर ने तैयार किया था। इसका उद्देश्य यूरोपीय खोजकर्ताओं को दुनिया भर में समुद्री यात्रा और दिशा-निर्धारण में मदद करना था। उनके मानचित्र में दिखाई देने वाली विकृति इस तथ्य का परिणाम है कि गोलाकार पृथ्वी की सतह को दो-आयामी मानचित्र पर पूरी तरह सटीक रूप से दर्शाना संभव नहीं है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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