Gold Import Duty Hike : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की एक अपील ने गोल्ड मार्केट और पॉलिसी सर्किल्स में नई चर्चा छेड़ दी है। रविवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने लोगों से अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने, ईंधन की खपत कम करने और विदेश यात्राओं में संयम बरतने की अपील की। इसके बाद अब यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अगर पश्चिम एशिया संकट और गहराता है तथा कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो सरकार सोने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी जैसे कदम उठा सकती है।
क्या सरकार बढ़ा सकती है Gold Import Duty?
हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञ पीएम मोदी के बयान को संभावित “कंटिजेंसी प्लान” के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्टर्स में शामिल है और घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है। ऐसे में यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं या वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होती है, तो देश का इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में सरकार गैर-जरूरी आयात को कम करने के लिए सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का विकल्प चुन सकती है। फिलहाल भारत में गोल्ड इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी और अन्य टैक्स मिलाकर प्रभावी टैक्स करीब 6% के आसपास बैठता है।
ईरान संकट और क्रूड ऑयल बना बड़ी चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। Brent Crude 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। तेल की कीमतों में तेजी भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट, महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सकती है। यही वजह है कि सरकार आयात और डॉलर आउटफ्लो को नियंत्रित करने वाले विकल्पों पर नजर बनाए हुए है।
पहले भी सरकार ने कसे थे नियम
हाल ही में सरकार ने कीमती धातुओं के आयात नियमों में भी सख्ती की थी। अप्रैल में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने कई गोल्ड, सिल्वर और प्लैटिनम उत्पादों को रेस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में डाल दिया था। इस कदम का उद्देश्य ट्रेड रूट्स के दुरुपयोग को रोकना और कीमती धातुओं के आयात पर निगरानी बढ़ाना था।
विदेश यात्रा और डॉलर आउटफ्लो पर भी नजर?
पीएम मोदी की विदेश यात्रा कम करने वाली अपील के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सरकार विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए बाहरी रेमिटेंस पर निगरानी बढ़ा सकती है। फिलहाल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की उदा उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के तहत भारतीय नागरिक हर साल 2.5 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकते हैं। इसका इस्तेमाल यात्रा, शिक्षा, निवेश और अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
क्या महंगा या सस्ता हो सकता है सोना?
यदि सरकार गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाती है, तो इसका सीधा असर घरेलू सोने की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे ज्वेलरी महंगी हो सकती है और मांग में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल सरकार ने कोई औपचारिक कदम घोषित नहीं किया है, लेकिन पीएम मोदी की अपील यह जरूर दिखाती है कि सरकार वैश्विक अस्थिरता, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और विदेशी मुद्रा पर दबाव को लेकर सतर्क मोड में है।
