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Go First के कर्मचारियों की नहीं होगी छंटनी, दिवालिया प्रक्रिया को मिली मंजूरी,क्या फिर उड़ान भरेगी एयरलाइन

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 10, 2023, 01:25 PM IST

Go First goes into insolvency process :एनसीएलटी ने गो फर्स्ट के परिचालन के लिये अभिलाष लाल को अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त किया। एयर लाइन पर करीब 6521 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद कंपनी के लिए अपने रिवाइवल प्लान को तैयार करना और फिर से पटरी पर आसान होगा।

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गो फर्स्ट को राहत

Go First goes into insolvency process :ग्राउंडेड हो चुकी Go First पर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने फैसला सुना दिया है। NCLT ने वित्तीय संकट से घिरी एयरलाइन गो फर्स्ट को दिवालिया प्रक्रिया से गुजरने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही NCLT ने यह भी कहा है कि Go First के कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जाएगी। इस निर्देश से कंपनी के 7000 कर्मचारियों के ऊपर से छंटनी की तलवार फिलहाल हट गई है।गो फर्स्ट ने अपना वित्तीय संकट गहराने के बाद एनसीएलटी के पास स्वैच्छिक दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी लगाई थी। हालांकि, एयरलाइन को पट्टे पर विमान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों ने इसका विरोध किया था। एयरलाइन ने 19 मई तक अपनी सभी उड़ानों को कैंसिल कर दिया है।

कंपनी बोली पटरी पर लाना होगा आसान

इस फैसले पर गो फर्स्ट के CEO कौशिक खोना ने कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का एयरलाइन की स्वैछिक दिवाला कार्यवाही याचिका स्वीकार करने का निर्णय ‘ऐतिहासिक फैसला है।’ उन्होंने कहा कि यह कंपनी को पटरी पर लाने के लिये समय पर आया प्रभावी निर्णय है।खोना ने पीटीआई-भाषा से फोन पर कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय है। साथ ही व्यवहारिक कारोबार को अव्यवहारिक होने से पहले उसे पटरी पर लाने का उपयुक्त उदाहरण भी है।उन्होंने कहा कि आदेश समय पर आया है और प्रभावी है।

एयरलाइन पर 6521 करोड़ की देनदारी

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पेशेवर से गो फर्स्ट को अपना काम तथा वित्तीय बाध्यताओं को पूरा करते रहने देने के साथ किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं करनी होगी । इसके लिए एनसीएलटी ने गो फर्स्ट के परिचालन के लिये अभिलाष लाल को अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त किया। साथ ही कंपनी के निदेशक मंडल को सस्पेंड कर दिया गया है। एयर लाइन पर करीब 6521 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद कंपनी के लिए अपने रिवाइवल प्लान को तैयार करना और फिर से पटरी पर आसान होगा। हालांकि इस फैसले की वजह से पट्टे पर विमान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के साथ मुश्किलें खड़ी हो सकती है।

वाडिया समूह की है Go First

वाडिया समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन ने विमान इंजन की आपूर्ति संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए कहा था कि वित्तीय संकट होने से वह उड़ानों का परिचालन नहीं कर पा रही है। उसने तीन मई से ही उड़ानें रद्द कर दी हैं और 19 मई तक टिकटों की बुकिंग भी नहीं कर रही है। इसके अलावा रेग्युलेटर डीजीसीए ने कंपनी को ग्राहकों के रिफंड देने के निर्देश दिए हैं।

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