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कच्चे तेल ने बिगाड़ा बजट, 95 देशों में महंगा हुआ Petrol; भारत में कब तक?

Global Petrol Price Surge: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा दिया है। आंकड़ों के अनुसार, वियतनाम में पेट्रोल की कीमत को लेकर करीब 50% और लाओस में 33% तक का बड़ा उछाल देखा गया है। अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी कीमतें 20% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं।

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95 देशों में बढ़े पेट्रोल के दाम (Photo: iStock)

Global Petrol Price Surge: 2026 के फरवरी अंत में ईरान पर संयुक्त रूप से अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारी उथल‑पुथल आई है। युद्ध के प्रभाव से अब तक कम से कम 95 देशों ने पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की है, जिससे न केवल वाहनों के ईंधन का खर्च बढ़ा है बल्कि रोजमर्रा की जीवन लागत पर भी दबाव बढ़ा है।

भारत में क्या है स्थिति

एनर्जी एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिस तरह से कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर के पार पहुंच गया है, इसे देखते हुए भारत में भी लंबे समय तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर नहीं रह सकेंगी। सरकार को कीमत में बढ़ोतरी का फैसला देर-सबेर लेना पड़ सकता है।

कहां कितनी बढ़ी पेट्रोल की कीमत

ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेस के डेटा के अनुसार, कुछ देशों में पेट्रोल की कीमतों में अब तक सबसे तेज बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो कंबोडिया में लगभग 68% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि वियतनाम में कीमतों में 50% तक का बड़ा उछाल आया है। इसी तरह नाइजीरिया में करीब 35%, लाओस में 33% और कनाडा में लगभग 28% तक का इजाफा हुआ है, जो विभिन्न देशों में बढ़ती महंगाई की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

इन 10 देशों में पेट्रोल की कीमतें सबसे अधिक बढ़ीं

क्रमांकदेशशुरुआती मूल्य (USD)अंतिम मूल्य (USD)वृद्धि प्रतिशत (%)
1कंबोडिया$1.11$1.3267.81%
2वियतनाम$0.75$1.1349.73%
3नाइजीरिया$0.59$0.8035.02%
4लाओस$1.34$1.7832.94%
5कनाडा$1.16$1.3028.36%
6पाकिस्तान$0.92$1.1524.49%
7मालदीव$0.87$1.0418.54%
8ऑस्ट्रेलिया$1.11$1.3118.23%
9संयुक्त राज्य अमेरिका$0.87$1.0116.55%
10सिंगापुर$2.16$2.5015.69%

ये बढ़ोतरी उस समय नजर आई है जब तेल की ग्लोबल सप्लाई तनाव के कारण घटी है और देशों को महंगा ईंधन खरीदना पड़ रहा है।

यूएस में भी असर

अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के एक रिटेल फ्यूल प्राइस ट्रैकर AAA फ्यूल प्राइसेज के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में रेगुलर पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। फरवरी में जो पेट्रोल औसतन 2.94 डॉलर प्रति गैलन मिल रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 3.58 डॉलर हो गई है, जो सीधे तौर पर 20% की बढ़ोतरी को दर्शाता है। अमेरिका में हर स्टेट अपने हिसाब से पेट्रोल की कीमतें तय करता है। कई स्टेट में कीमतें अब 4 डॉलर प्रति गैलन के आंकड़े को पार कर गई हैं। कैलिफोर्निया में पेट्रोल के दाम 5 डॉलर प्रति गैलन से भी ऊपर निकल गए हैं, जो पिछले दो से अधिक वर्षों में इसका उच्चतम स्तर है।

एशिया में सबसे बड़ा जोखिम

विशेष रूप से एशियाई देश, जो मध्य पूर्व से कच्चे तेल पर अधिक निर्भर हैं, इस बढ़ोतरी से अत्यधिक प्रभावित हैं। उदाहरण के लिए जापान और दक्षिण कोरिया लगभग 70–95% तेल आयात करते हैं, जिससे कीमतों के बढ़ने का प्रभाव बेहद गंभीर है। दक्षिण एशिया के कुछ आर्थिक रूप से कमजोर देश जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश को ऊर्जा लागत संभालने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ईंधन कीमतों में उछाल की वजह

सबसे बड़ा कारण यह है कि युद्ध की वजह से शिपिंग मार्गों खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आई है, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और तेल की मांग और कीमतें दोनों बढ़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल तेल के लगभग 20% यातायात का मार्ग है और जब यह रुकता है तो वैश्विक तेल बाजार में भारी दबाव पैदा होता है।

उपभोक्ताओं के लिए चुनौती

महंगे पेट्रोल का प्रभाव केवल वाहनों पर नहीं है, बल्कि यह खाद्य, परिवहन, वस्तु ढुलाई और कई उद्योगों के खर्च को भी बढ़ाता है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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