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बड़े शान से पहनते हैं Bata के जूते, विदेशी ब्रांड कैसे बन गया भारतीय

Bata इंडिया देश की सबसे बड़ी फुटवियर रिटेल कंपनी है। 1931 में स्थापित यह ब्रांड आज 1,375 से अधिक स्टोर्स और 30,000 डीलरों के नेटवर्क के जरिए करोड़ों ग्राहकों तक पहुंचता है। लेकिन इसकी शु्रुआत विदेशों में हुई थी।

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बाता (Bata): एक वैश्विक ब्रांड जो हर देश में बन गया ‘लोकल’ पहचान (तस्वीर-फेसबुक)

Bata एक ऐसा ब्रांड है जिसे भारत के अधिकांश लोग अपने देश की कंपनी मानते हैं, लेकिन वास्तव में इसकी शुरुआत भारत में नहीं हुई थी। यह ब्रांड (Bata brand) 1894 में जल्नि (Zlín) में स्थापित हुआ था, जो उस समय चेकोस्लोवाकिया में था और आज के समय में चेक गणराज्य में आता है, वहां शुरू हुआ था। बाद में कंपनी का मुख्यालय स्विट्जरलैंड में स्थापित हुआ। आज बाटा भारत समेत दुनिया के सबसे बड़े जूता ब्रांड्स में से एक है, जो कई देशों में अपने स्टोर्स और प्रोडक्ट्स के लिए जाना जाता है। भारत में बाटा सिर्फ एक ब्रांड नहीं बल्कि एक भरोसेमंद नाम बन चुका है। यहां की कई पीढ़ियां बाटा के जूते पहनकर बड़ी हुई हैं। स्कूल के जूते हों, ऑफिस शूज हों या रोजमर्रा के इस्तेमाल के सस्ते और टिकाऊ जूते। बाटा ने हर वर्ग के लोगों की जरुरतों को पूरा किया है। यही वजह है कि भारत में बहुत से लोग इसे एक भारतीय ब्रांड मान लेते हैं, जबकि इसकी जड़ें यूरोप में हैं।

भारत में बाटा

बाटा इंडिया भारत का सबसे बड़ा फुटवियर रिटेलर और प्रमुख जूता निर्माता है। यह विश्व प्रसिद्ध बाटा शू ऑर्गेनाइजेशन का हिस्सा है। कंपनी की स्थापना वर्ष 1931 में बाता शू कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के रूप में हुई थी। शुरुआत में इसका संचालन 1932 में कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) के पास स्थित कोन्नगर में छोटे स्तर पर शुरू किया गया। जनवरी 1934 में बाटा के पहले भवन की आधारशिला रखी गई, जो आज बाटानगर के नाम से जाना जाता है। आने वाले वर्षों में इस परिसर का लगातार विस्तार किया गया और यह एक बड़े औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित हुआ। बाटानगर भारतीय जूता उद्योग की पहली विनिर्माण इकाई थी जिसे ISO 9001 प्रमाणन प्राप्त हुआ। वर्ष 1973 में कंपनी ने अपना नाम बदलकर बाटा इंडिया लिमिटेड कर लिया। आज बाटा इंडिया देश की सबसे बड़ी फुटवियर रिटेल कंपनी के रूप में स्थापित हो चुकी है।

कंपनी के पास देशभर में 1,375 से अधिक रिटेल स्टोर्स का विशाल नेटवर्क है, जिसकी पहुंच किसी भी अन्य फुटवियर कंपनी से कहीं अधिक है। इसके स्टोर देश के सभी प्रमुख महानगरों, छोटे शहरों और कस्बों में मौजूद हैं तथा बेहतर स्थानों पर स्थित हैं। रिटेल कारोबार के अलावा, कंपनी का एक मजबूत गैर-रिटेल वितरण नेटवर्क भी है। अपनी अर्बन होलसेल डिवीजन के माध्यम से बाटा देशभर में 30,000 से अधिक डीलरों के जरिए लाखों ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचाती है। आज बाटा सिर्फ एक जूता ब्रांड नहीं, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के भरोसे, गुणवत्ता और लंबे इतिहास का प्रतीक बन चुका है।

टाउनशिप मॉडल

बाटा की सबसे खास रणनीति उसका टाउनशिप मॉडल है, जिसने इसे दुनिया भर में स्थानीय पहचान दिलाई। इस मॉडल के तहत बाटा सिर्फ फैक्ट्री नहीं बनाता, बल्कि उसके आसपास पूरा एक शहर बसाता है। इन टाउनशिप्स में कर्मचारियों के लिए घर, स्कूल, अस्पताल, पार्क और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों का ब्रांड से गहरा जुड़ाव बन जाता है। यह सिर्फ नौकरी देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक सामाजिक जीवन का हिस्सा बन जाता है। भारत में भी इस मॉडल के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। कोलकाता के पास बाटानगर और पटना के पास बाटा गंज जैसे इलाके इसी रणनीति का रिजल्ट हैं। यहां कई पीढ़ियों से लोग बाटा से जुड़े हुए हैं। इसी तरह पाकिस्तान में बाटापुर, कनाडा में बाटावा और नीदरलैंड में बाटा डॉर्प जैसे स्थान भी इस मॉडल की मिसाल हैं।

स्थानीय भाषा और संस्कृति के अनुसार ब्रांडिंग

बाटा की सफलता का एक बड़ा कारण उसकी स्थानीयकरण रणनीति है। यह कंपनी हर देश में खुद को उस देश की संस्कृति और भाषा के अनुसार ढाल लेती है। भारत में बाटा के विज्ञापन हिंदी, बंगाली, ओड़िया और अन्य भाषाओं में बनाए जाते हैं। कई जगह स्टोर्स पर नाम भी स्थानीय भाषा में लिखा जाता है। यही नहीं, यूरोप और अन्य देशों में भी बाटा अपने विज्ञापन और प्रचार सामग्री को वहां की संस्कृति के अनुसार बदलता है। यह रणनीति लोगों को यह महसूस कराती है कि बाटा कोई विदेशी कंपनी नहीं बल्कि उनकी अपनी स्थानीय कंपनी है।

प्रोडक्ट और बाजार की समझ

बाटा सिर्फ अपनी ब्रांडिंग ही नहीं, बल्कि अपने उत्पादों को भी स्थानीय जरुरतों के अनुसार बदलता है। भारत में स्कूल यूनिफॉर्म के लिए मजबूत और सस्ते जूते, यूरोप में फैशन आधारित डिजाइन और ठंडे देशों में मजबूत बूट्स हर जगह बाटा अपने ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार प्रोडक्ट तैयार करता है। इस वजह से यह ब्रांड हर बाजार में अलग पहचान बनाता है, लेकिन फिर भी स्थानीय लगता है।

मार्केटिंग और भरोसे की रणनीति

बाटा की मार्केटिंग हमेशा सरल, समझने योग्य और आम लोगों से जुड़ी रही है। यह ब्रांड महंगे और दिखावटी विज्ञापनों की जगह भरोसे और उपयोगिता पर ध्यान देता है। यही कारण है कि यह लोगों के बीच लंबे समय तक भरोसेमंद बना रहता है।

एक वैश्विक ब्रांड, लेकिन स्थानीय पहचान

बाटा की कहानी यह दिखाती है कि एक कंपनी कैसे दुनिया भर में फैलकर भी हर जगह स्थानीय बन सकती है। अपनी टाउनशिप रणनीति, स्थानीय भाषा में ब्रांडिंग और जरूरत के अनुसार उत्पादों के कारण बाटा ने हर देश में लोगों के दिल में जगह बनाई है। आज बाटा सिर्फ जूते बेचने वाली कंपनी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ब्रांड है जो हर देश की संस्कृति और जीवन का हिस्सा बन चुका है। यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है हर जगह अपना घर बना लेना।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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