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मंथ एंड मनी क्राइसिस से छुटकारा पाएं, बस अपनाएं 70-10-10-10 का फॉर्मूला

Money Management Tips: पैसे की किल्लत से बचने के लिए ईमानदारी से हर महीने के खर्चों को ट्रैक करना शुरू करें। फिर देखें कि आप आज कहां फिजूलखर्ची कर रहे हैं। हो सकता है कि आप रहने के खर्चों पर 85 परसेंट खर्च कर रहे हों। यहां सुधार करें।

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पैसा

Money Management Tips: आज के समय में अधिकांश युवा अच्छी सैलरी पाने के बाद मंथ एंड में पैसे की किल्लत से जुझते हैं। ऐसा क्यों? इसकी सबसे बड़ी वजह कमाई के बावजूद बिना प्लानिंग खर्च की लत है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट का कहना है कि युवाओं में बिना सोचे समझें खरीदारी करने और बजट नहीं बनने की लत तेजी से बढ़ी है। इससे वो मनी क्राइसिस से जूझ रहे हैं। हालांकि, इससे बचा जा सकता है। आज हम आपको 70/10/10/10 का फॉर्मूला बता रहे हैं। इसे अपना कर आसानी से पैसे की किल्लत से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि क्या है यह फॉर्मूला?

क्या है 70/10/10/10 फॉर्मूला?

इस फॉर्मूले के तहत आप अपनी महीने की सैलरी को चार हिस्सों में बंटे। 70% रहने के खर्चों पर, इसमें किराया, किराने का सामान, यूटिलिटी बिल, ट्रांसपोर्ट, इंश्योरेंस प्रीमियम, स्कूल फीस, और रोजाना का खर्च शामिल है। यह हिस्सा आज की जिंदगी के खर्चों को कवर करता है।

10% लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग के लिए है। यह पैसा सालों में दौलत बनाने के लिए है, महीनों में नहीं। इक्विटी म्यूचुअल फंड, रिटायरमेंट अकाउंट, या कोई भी अनुशासित लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट यहां फिट बैठता है।

10% शॉर्ट-टर्म सेविंग्स के लिए है। यह आपका सेफ्टी और फ्लेक्सिबिलिटी वाला पैसा है। इमरजेंसी फंड, आने वाले खर्च जैसे ट्रैवल, अप्लायंसेज, या मेडिकल खर्च इस हिस्से में आते हैं।

आखिरी 10% कर्ज चुकाने या पर्सनल ग्रोथ के लिए है। आपकी स्थिति के आधार पर, यह ज्यादा इंटरेस्ट वाले लोन चुकाने, कोई स्किल सीखने, या थेरेपी या पढ़ाई पर खर्च किया जा सकता है जिससे भविष्य में कमाई की क्षमता बढ़े।

अगर आप अपनाएंगे तो क्या फायदा मिलेगा?

यह फॉर्मूला मानसिक रूप से आपको टेंशन फ्री करता है। आपके लिए पैसे की किल्लत का टेंशन खत्म हो जाती है और छोटे फैसले लेना आसान हो जाता है। आपको पता होता है कि क्या बिना किसी टेंशन के खर्च किया जा सकता है और क्या नहीं करना है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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