Antibiotics In Food Item: भारत के फूड सेफ्टी रेगुलेटर ने मांस और मांस उत्पादों, दूध और दूध उत्पादों, मुर्गी पालन, अंडे और जलीय कृषि के लिए एंटीबायोटिक अवशेषों के मानदंडों को कड़ा कर दिया है, जिन स्तरों की मंजूरी दी गई थी उसे कम कर दिया है और पहले से ज्यादा दवाओं को अपनी निगरानी सूची में रखा है। इस कदम का मकसद 'सुपरबग' की बढ़ती समस्या से निपटना है, जो बैक्टीरिया और कवक (Fungi) हैं जो दवा के 'दुरुपयोग' के कारण एंटीबायोटिक दवाओं और अन्य दवाओं के मुकाबले प्रतिरोध विकसित कर चुके हैं।
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अगले साल लागू होंगे नियम
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की तरफ से तय की गईं संशोधित सीमाएँ 1 अप्रैल, 2025 से लागू होंगी। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार कंज्यूमर्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन (सीपीए) के कार्यकारी अध्यक्ष जॉर्ज चेरियन ने कहा, "अगर सख्ती से लागू किया जाता है, तो नियम विभिन्न फूड आइटम्स में सख्त अवशेष और कंटामिनेंट्स सीमाएँ निर्धारित करके उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित फूड प्रोडक्ट सुनिश्चित करेंगे और एंटीमाइक्रोबायल रेसिस्टेंट से निपटने में मदद करेंगे।
शहद उत्पादन में एंटीबायोटिक पर बैन
FSSAI ने शहद उत्पादन के दौरान एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है और गेहूं, गेहूं के चोकर, जौ, राई और कॉफी में ओक्रैटॉक्सिन ए और डीओक्सीनिवेलनॉल रसायनों की सीमा को नई क्षमता में तय किया है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मूत्र मार्ग में संक्रमण (UTI), रक्त संक्रमण, निमोनिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों ने आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध डेवलप कर लिया है, जिससे उपचार और भी मुश्किल हो गया है।
