बिजनेस

यूं नहीं गिर रहा बाजार, 5 दिन में विदेशी निवेशकों ने निकाले 18000 करोड़

FPI Withdraw: इसके साथ ही वर्ष 2025 में अब तक एफपीआई की कुल इक्विटी निकासी 1.13 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है। डिपॉजिटरी से मिले आंकड़ों के मुताबिक, एक से आठ अगस्त के बीच एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार से शुद्ध रूप से 17,924 करोड़ रुपये निकाले। इससे पहले जुलाई में भी उन्होंने 17,741 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी।

Image

FPI Withdraw (Pic credit: istock)

Photo : iStock

FPI Withdraw: अमेरिका के साथ व्यापार तनाव, पहली तिमाही में कंपनियों के कमजोर नतीजों और रुपये की कीमत में गिरावट की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त महीने में अब तक भारतीय शेयर बाजार से करीब 18,000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2025 में अब तक एफपीआई की कुल इक्विटी निकासी 1.13 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है। डिपॉजिटरी से मिले आंकड़ों के मुताबिक, एक से आठ अगस्त के बीच एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार से शुद्ध रूप से 17,924 करोड़ रुपये निकाले। इससे पहले जुलाई में भी उन्होंने 17,741 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी।

हालांकि मार्च से जून की अवधि में एफपीआई ने 38,673 करोड़ रुपये का निवेश किया था। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया में सह निदेशक एवं शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि हालिया निकासी का मुख्य कारण भारत-अमेरिका के बीच बढ़ता व्यापार तनाव, कमजोर तिमाही नतीजे और रुपये में आई कमजोरी है। जुलाई के अंत में ही अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा कर दी थी। पिछले सप्ताह उसने अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी लगा दिया जिससे बाजारों में घबराहट और बिकवाली का माहौल बन गया।

ब्रोकरेज फर्म एंजल वन के वरिष्ठ विश्लेषक वकार जावेद खान ने कहा कि इस स्थिति ने एफपीआई की धारणा को झटका दिया और निवेशकों ने जोखिम से दूर रहने की रणनीति अपनाई। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से भी विदेशी पूंजी अमेरिका की ओर प्रवाहित हो रही है। हालांकि, समीक्षाधीन अवधि में एफपीआई ने 3,432 करोड़ रुपये सामान्य ऋण सीमा में और 58 करोड़ रुपये स्वैच्छिक अवधि निवेश मार्ग (वीआरआर) में निवेश किया।

खान ने आगाह किया कि आगे भी एफपीआई का रुझान कमजोर बना रह सकता है और व्यापार वार्ताएं एवं शुल्क विवाद आगामी सप्ताह में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना देने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है और इसे किसी प्रकार की निवेश सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल अपने पाठकों/दर्शकों को सलाह देता है कि किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article