इंदौर : मेघालय में अपने हनीमून के दौरान मारे गए राजा रघुवंशी की शादी को करीब 15 महीने बीत चुके हैं। अब इस मामले से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। शादी में कैटरिंग का काम संभालने वाले कैटरर ने मंगलवार को स्थानीय पुलिस से संपर्क कर कथित तौर पर 2.82 लाख रुपये के बकाया भुगतान को वसूलने में मदद की गुहार लगाई है। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
कैटरर का आरोप और पुलिस का रुख
इंदौर के रहने वाले कैटरर हितेश रोहिरा ने बताया कि राजा और सोनम के परिवारों ने मिलकर उन्हें शादी में कैटरिंग का ठेका दिया था, जिसकी कुल राशि 11,42,550 रुपये थी। उनका दावा है कि उन्हें इसमें से 8,60,000 रुपये मिल चुके हैं, जबकि 2,82,550 रुपये अभी भी बकाया हैं।
रोहिरा के अनुसार, बकाया राशि को लेकर उन्होंने राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी और सोनम के बड़े भाई गोविंद रघुवंशी से कई बार संपर्क किया, लेकिन दोनों पक्ष भुगतान को लेकर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं। उन्होंने 1 अप्रैल को अपने वकील के जरिए दोनों को कानूनी नोटिस भी भेजा था, लेकिन इसके बावजूद रकम नहीं मिल पाई। इसके बाद वह द्वारकापुरी पुलिस थाने शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे।
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इस संबंध में द्वारकापुरी पुलिस स्टेशन के प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पैसे के लेन-देन का यह विवाद एक दीवानी (सिविल) मामला है, इसलिए इसमें पुलिस हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे
राजा के भाई विपिन रघुवंशी का कहना है कि कैटरर को सोनम के बड़े भाई गोविंद ने बुक किया था और उनके परिवार का कैटरर के साथ कोई बकाया लेन-देन नहीं है।
वहीं, सोनम के भाई गोविंद रघुवंशी ने कैटरर के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि कैटरर का लगभग पूरा भुगतान पहले ही चुकाया जा चुका है। गोविंद ने सवाल उठाया कि कैटरर पिछले 15 महीनों से कहां था और अब अचानक ऐसी मांग सिर्फ सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए उठाई जा रही है।
क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि पिछले साल राजा और सोनम अपनी शादी के कुछ दिन बाद मेघालय हनीमून पर गए थे, जहां दोनों लापता हो गए थे। बाद में पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा (चेरापूंजी) इलाके में एक झरने के पास गहरी खाई से राजा का शव बरामद किया गया था।
मेघालय पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड में सोनम, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह और तीन सुपारी किलर को गिरफ्तार किया था। शिलोंग में 10 महीने से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद सोनम को जमानत मिल गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को सोनम को दी गई जमानत को रद्द करते हुए उसे तीन हफ्ते के भीतर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
