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संसद में उठे इथेनॉल पर सवाल, सरकार ने दिया सब्सिडी का हिसाब, बताया कितना हुआ खर्च?

संसद के मानसून सत्र में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच हाल में ही सरकार ने बताया है कि इथेनॉल के लिए सरकार ने सब्सिडी पर कितना खर्च किया है।

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सरकार ने दिया हिसाब कितना हुआ खर्च

Subsidy on Ethanol Blending : संसद के मौजूदा मानसून सत्र में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर सरकार से कई अहम सवाल पूछे गए। इन सवालों में इथेनॉल परियोजनाओं को मिलने वाली ब्याज सब्सिडी, ई-20 पेट्रोल के असर, खाद्य सुरक्षा और उत्पादन क्षमता जैसे मुद्दे शामिल रहे। सरकार ने अपने जवाबों में कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है तथा इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।

सब्सिडी पर कितना खर्च?

सबसे ताजा जवाब में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा को बताया कि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत अब तक ₹4,687 करोड़ की ब्याज सब्सिडी मंजूर की है। यह सहायता नई डिस्टिलरी लगाने और मौजूदा इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं को दी जा रही है। योजना के तहत सरकार पांच साल तक कर्ज पर 6% ब्याज या बैंक की ब्याज दर का 50%, जो भी कम हो, वहन करती है। 2022-23 से अब तक ₹2,075 करोड़ नाबार्ड को जारी किए जा चुके हैं।

इथेनॉल ब्लेंडिंग का भविष्य

इससे पहले लोकसभा में ई-20 पेट्रोल को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को चरणबद्ध, वैज्ञानिक और व्यापक परामर्श के आधार पर लागू किया गया है। सरकार ने पहले उत्पादन क्षमता, आपूर्ति व्यवस्था और जरूरी बुनियादी ढांचे को विकसित किया, उसके बाद ही ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ाया गया।

अभी 20% मानक

राज्यसभा में एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य का देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है। सरकार ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और बफर स्टॉक की जरूरत पूरी करने के बाद ही बचा हुआ अनाज इथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

समय से पहले हासिल किया लक्ष्य

सरकार पहले भी संसद में बता चुकी है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत दिसंबर 2025 में 20% ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया गया। इस कार्यक्रम से फरवरी 2026 तक किसानों को ₹1.50 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान, ₹1.70 लाख करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत और कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय कमी आई है। संसद में दिए गए इन जवाबों से साफ है कि सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने और तेल आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति के अहम हिस्से के रूप में आगे बढ़ा रही है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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