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50 सालों में पहली बार अमेरिका में जितने प्रवासी आएंगे नहीं उससे ज्यादा हो जाएंगे बाहर! US अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर

Emigrating From US New Reality: कम से कम आधी सदी में पहली बार, इस साल अमेरिका छोड़ने वाले लोग आने वालों से अधिक हो सकते हैं, जो आप्रवासन में बड़ा बदलाव है और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है। वाशिंगटन के दो थिंक टैंक के अर्थशास्त्री मानते हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प की कड़ी नीतियां दक्षिणी सीमा बंद, अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर दबाव और कानूनी स्थिति खत्म होना, इस बदलाव के मुख्य कारण हैं। निर्वासन की बढ़ोतरी भी इसमें योगदान दे रही है।

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अमेरिका से पलायन को मजबूर हुए लोग

Photo : iStock

Emigrating From US New Reality: 2025 में अमेरिका एक अनोखी और चिंताजनक स्थिति का सामना कर रहा है। 50 वर्षों के बाद पहली बार ऐसा हो सकता है कि अमेरिका में रहने वाले लोगों की संख्या घटे, यानी इस साल अमेरिका छोड़कर बाहर जाने वाले लोगों की संख्या, नए आने वालों से ज्यादा हो जाए। यह बदलाव अमेरिका की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर डाल सकता है।

washingtonpost डॉट कॉम की रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स के मुताबिक बताया गया कि इस बदलाव के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कठोर आव्रजन नीतियां (Immigration policies) मुख्य कारण हैं। दक्षिणी सीमा को करीब पूरी तरह बंद करना, अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर प्रतिबंध लगाना, और कई नए आए प्रवासियों का कानूनी दर्जा छीनना इस बदलाव को तेज कर रहा है। साथ ही, हाल ही में हुई कार्यस्थल छापों और डिपोर्टेशन की बढ़ती संख्या ने भी कई प्रवासियों को अमेरिका छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।

इस प्रवासी पलायन का असर केवल समाज पर ही नहीं, बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासियों की कमी से मजदूर बाजार में संकट पैदा होगा, खासकर कृषि, निर्माण और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में, जो विदेशी श्रमिकों पर भारी निर्भर हैं। इसके अलावा, प्रवासियों की संख्या कम होने से टैक्स देने वालों की संख्या घटेगी, जिससे सामाजिक सुरक्षा और अन्य सरकारी कार्यक्रमों को वित्तीय नुकसान हो सकता है।

2024 में विदेशी श्रमिकों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची थी, लेकिन अब अचानक इसमें गिरावट आ रही है। यह गिरावट विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महसूस की जा रही है, जहां प्रवासियों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। फ्लोरिडा के एक रिटायरमेंट समुदाय में हाल ही में कई हैती और क्यूबा के श्रमिकों को काम से निकाला गया क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने उनके अस्थायी काम के अधिकार रद्द कर दिए। इससे न केवल वहां काम का बोझ बढ़ा है, बल्कि मजदूरी भी बढ़ने लगी है, जो अंततः सेवाओं की लागत बढ़ा देगी।

अमेरिकी सरकार इस साल करीब एक मिलियन प्रवासियों को देश से निकालने की योजना बना रही है। इसके लिए हाल ही में संसद में एक बिल भी पास किया गया है, जिसमें $150 बिलियन आव्रजन प्रवर्तन के लिए आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, चीनी छात्रों के लिए वीजा रद्द करने की भी धमकी दी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय छात्र भी अमेरिका आने से हिचक रहे हैं।

हालांकि, कोर्ट के हस्तक्षेप और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासन की कई योजनाओं को रोक दिया है। कुछ उद्योगों में छापे रोक दिए गए हैं, क्योंकि उन उद्योगों ने श्रमिकों की कमी की शिकायत की है। फिर भी, प्रवासियों की संख्या में गिरावट जारी है और यह अमेरिका की जनसांख्यिकीय और आर्थिक स्थिति के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

फेडरल रिजर्व की गवर्नर आद्रिआना कुगलर ने बताया कि प्रवासियों की संख्या में कमी से मजदूरों की उपलब्धता घट रही है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा है। अब तक मजदूरी में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय में बदल सकती है।

कई प्रवासी खुद ही अमेरिका छोड़ना पसंद कर रहे हैं। कोलोराडो की एक महिला ने, जो पहचान छुपाना चाहती हैं, मार्च में अपने परिवार के साथ वेनेजुएला लौटने का फैसला किया। उनका डर था कि प्रशासन की कड़ी नीतियों के कारण उन्हें पकड़ लिया जाएगा और उनके बच्चे अकेले रह जाएंगे। यह परिवार राष्ट्रपति जो बाइडेन के मानवीय परोल कार्यक्रम के तहत अमेरिका आया था, लेकिन अब वापस जाना मजबूरी बन गई।

यह कहानी अमेरिका की एक बदलती हुई सच्चाई को दर्शाती है, जहां कड़े नियम और नीतियां लोगों को पलायन के लिए मजबूर कर रही हैं, और देश की आर्थिक ताकत को भी चुनौती दे रही हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि अमेरिका इस स्थिति से कैसे निपटता है और अपनी जनसांख्यिकीय चुनौतियों का समाधान कैसे करता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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