Fitch Ratings Iran conflict report 2026: रेटिंग एजेंसी फिच ने सोमवार को कहा कि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए तेल-गैस आयात, प्रवासी समुदाय की तरफ से भेजी जाने वाली विदेशी मुद्रा और विनिमय दर जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
वैश्विक निवेशकों की धारणा हो सकती है प्रभावित
भाषा (पीटीआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिच रेटिंग्स ने ’ईरान संघर्ष से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उपजे नए ऋण जोखिम’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा कि अगर खाड़ी क्षेत्र से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अपेक्षा से अधिक व्यवधान आता है तो वैश्विक निवेशकों की धारणा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर भी दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है और खासकर उच्च जोखिम वाले उधारकर्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कर्ज जारी करना मुश्किल हो सकता है। फिच ने कहा, "ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर भी दबाव बढ़ेगा और इससे दुनिया भर में मौद्रिक नीति के फैसलों पर असर पड़ सकता है।"
तेल और गैस आयात पर दिखेगा प्रभाव
रिपोर्ट के मुताबिक, तेल और गैस आयात पर इस संघर्ष का सबसे सीधा असर देखने को मिलेगा। इसकी वजह यह है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुद्ध जीवाश्म ईंधन आयात सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तीन प्रतिशत या उससे अधिक के बराबर है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल एवं गैस का परिवहन एक महीने से कम समय तक बंद रहता है और क्षेत्र के तेल उत्पादन ढांचे को बड़ा नुकसान नहीं होता है तो उभरती अर्थव्यवस्थाओं की साख पर जोखिम सीमित रह सकता है। हालांकि लंबे समय तक यह व्यवधान कायम रहने की स्थिति में असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। आयात की लागत बढ़ने से पाकिस्तान जैसे उन देशों पर दबाव अधिक होगा जिनकी वित्तीय क्षमता पहले से कमजोर है या जिनका चालू खाता घाटा अधिक है।
सरकारों पर बढ़ सकता है वित्तीय दबाव
रिपोर्ट कहती है कि ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से उन सरकारों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकते हैं, जो उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ईंधन पर सब्सिडी देती हैं या कीमतों में बढ़ोतरी के जवाब में ऐसी योजनाएं शुरू करती हैं।
