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ITR फाइलिंग के 30 दिन के अंदर ही क्यों कर लेना चाहिए e-वेरिफिकेशन?

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर e-Verification करना जरुरी है। ऐसा नहीं करने पर आयकर विभाग आपके ITR को प्रोसेस नहीं करेगा और आपको रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है।

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ITR फाइलिंग के 30 दिन के अंदर ही क्यों कर लेना चाहिए e-वेरिफिकेशन?

अगर आपने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर दिया है, और अब रिलैक्स्ड हैं कि चलिए अब तो काम खत्म तो रुक जाइए। ITR फाइल करने के बाद भी एक काम है जो बेहद जरुरी है। सिर्फ ITR दाखिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफाई करना भी जरूरी है। ई-वेरिफिकेशन के बाद ही आयकर विभाग (Income Tax) आपके रिटर्न को पूरा मानता है और उसकी प्रोसेसिंग शुरू होती है। अच्छी बात यह है कि इसे आधार OTP, नेट बैंकिंग, EVC और डिजिटल सिग्नेचर समेत कई तरीकों से घर बैठे पूरा किया जा सकता है। ऐसे में आइए बताते हैं ITR फाइलिंग के 30 दिन के अंदर ही ये काम क्यों जरुरी है?

क्यों जरुरी है e-वेरिफिकेशन?

आयकर विभाग के मौजूदा नियमों के मुताबिक, आईटीआर सबमिट करने के बाद टैक्सपेयर्स को इसे ई-वेरिफाई करने के लिए अधिकतम 30 दिनों का समय मिलता है; और यदि कोई निवेशक या नौकरीपेशा इस निर्धारित समय सीमा के भीतर यह काम पूरा करने में विफल रहता है, तो उसका भरा हुआ रिटर्न पूरी तरह से 'अमान्य' या इनवैलिड (Invalid) घोषित कर दिया जाता है, जिसका सीधा मतलब यह है कि विभाग यह मान लेगा कि आपने उस साल का रिटर्न भरा ही नहीं था। आईटीआर के अमान्य होने से न केवल टैक्सपेयर्स को बिना वजह मिलने वाले टैक्स रिफंड में भारी देरी होती है या वह अटक जाता है, बल्कि समय सीमा खत्म होने के बाद दोबारा फाइलिंग करने पर उन्हें भारी लेट फीस (Late Fee) और टैक्स देनदारी पर ब्याज के रूप में एक बड़ा वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ सकता है, जिससे बचने के लिए इस डिजिटल सत्यापन को समय पर करना बेहद आवश्यक है।

रिफंड में हो जाती है देरी?

तकनीकी और व्यावहारिक रूप से, आयकर विभाग इस 30 दिनों की अवधि का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए करता है कि जो रिटर्न दाखिल किया गया है वह वास्तव में उसी संबंधित टैक्सपेयर द्वारा भरा गया है और उसमें दी गई जानकारी पूरी तरह से प्रामाणिक है। समय पर ई-वेरिफिकेशन करने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि आयकर विभाग तुरंत आपके डेटा को प्रोसेस करना शुरू कर देता है, जिससे यदि आपका कोई रिफंड बन रहा हो, तो वह बिना किसी अड़चन के सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाता है।

कैसे कर सकते हैं e-वेरिफिकेशन?

इस प्रक्रिया को बेहद सुगम और कागजरहित बनाने के लिए विभाग ने टैक्सपेयर्स को 6 अलग-अलग आसान तरीके प्रदान किए हैं, जिसके तहत आधार ओटीपी (Aadhaar OTP) है, जिसमें आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक वन-टाइम पासवर्ड आता है और उसे दर्ज करते ही वेरिफिकेशन सेकंडों में हो जाता है। इसके अलावा, टैक्सपेयर्स अपने नेट बैंकिंग (Net Banking) लॉग-इन के जरिए, बैंक खाते के माध्यम से प्री-वैलिडेटेड बैंक अकाउंट (EVC) जनरेट करके, डीमैट अकाउंट के जरिए, एटीएम (ATM) के माध्यम से या फिर डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) का उपयोग करके भी अपने रिटर्न को आसानी से सत्यापित कर सकते हैं।

ऐसे भी कर सकते हैं e-वेरिफिकेशन?

अगर कोई टैक्सपेयर इन सभी डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने में असमर्थ है, तो विभाग उसे एक पारंपरिक भौतिक विकल्प भी देता है, जिसके तहत वे अपने आईटीआर-वी (ITR-V) फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर और उस पर अपने हस्ताक्षर करके 'सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC), इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, बेंगलुरु' को साधारण या स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज सकते हैं, बशर्ते वह दस्तावेज भी 30 दिनों के भीतर वहां पहुंच जाना चाहिए। डिजिटल युग में घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से ई-वेरिफाई करना न केवल डाक के खोने या देरी होने के जोखिम को खत्म करता है, बल्कि आपको तुरंत एक कन्फर्मेशन रसीद भी प्रदान करता है जो भविष्य के लिए आपके पास एक पुख्ता कानूनी रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रहती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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