कुछ लोग बाजार से जुड़े निवेश में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करते हैं, जबकि कई निवेशक अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना चाहते हैं। ऐसे निवेशकों के पास फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और म्यूचुअल फंड दो निवेश विकल्प बचते हैं। हालांकि, दोनों निवेश साधनों की अपनी-अपनी खूबियां और सीमाएं हैं।
FD में मिलता है निश्चित रिटर्न और सुरक्षा
फिक्स्ड डिपॉजिट लंबे समय से भारतीय निवेशकों की पहली पसंद रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि इसमें निवेशक को पहले से पता होता है कि तय अवधि के बाद उसे कितनी राशि मिलेगी। बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान अलग-अलग अवधि के लिए FD की सुविधा देते हैं, जिसमें निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार अवधि चुन सकता है।
FD में बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई सीधा असर नहीं पड़ता। यानी शेयर बाजार गिरने या बढ़ने से आपकी FD की राशि प्रभावित नहीं होती। यही वजह है कि रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके लोग या जोखिम से बचने वाले निवेशक FD को प्राथमिकता देते हैं।
हालांकि, FD का रिटर्न पहले से तय होता है और इसमें मिलने वाला ब्याज बाजार आधारित निवेशों की तुलना में कई बार कम हो सकता है। इसके अलावा FD से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स भी लागू होता है, जिससे वास्तविक रिटर्न प्रभावित हो सकता है।
Mutual Fund में ज्यादा रिटर्न की संभावना
वहीं, दूसरी ओर म्यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश विकल्प है, जिसमें आपका पैसा शेयर बाजार, बॉन्ड या दूसरे एसेट्स में निवेश किया जाता है। इसमें निवेश का प्रबंधन फंड मैनेजर करते हैं। म्यूचुअल फंड की कई कैटेगरी होती हैं, जैसे इक्विटी फंड, डेट फंड और हाइब्रिड फंड
कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए डेट म्यूचुअल फंड या हाइब्रिड फंड जैसे विकल्प ज्यादा सही हो सकते हैं, क्योंकि इनमें जोखिम इक्विटी फंड की तुलना में कम होता है। वहीं, लंबी अवधि में म्यूचुअल फंड FD की तुलना में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।
लेकिन म्यूचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती। बाजार की स्थिति के अनुसार निवेश की वैल्यू ऊपर-नीचे हो सकती है। इसलिए इसमें निवेश करने से पहले जोखिम को समझना जरूरी है।
FD और Mutual Fund में किसे चुनें
निवेश का फैसला आपकी उम्र, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है। अगर आपका लक्ष्य पैसा सुरक्षित रखना है और आपको निश्चित रिटर्न चाहिए तो FD आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
वहीं, अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर सकते हैं और थोड़ा बहुत बाजार जोखिम उठा सकते हैं, तो म्यूचुअल फंड आपके लिए बेहतर रिटर्न का अवसर दे सकता है।
कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए बैलेंस्ड तरीका
कई वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेशकों को अपनी पूरी राशि केवल एक जगह निवेश करने के बजाय अलग-अलग विकल्पों में बांटनी चाहिए। एक हिस्सा सुरक्षित निवेश जैसे FD में रखा जा सकता है, जबकि दूसरा हिस्सा लंबी अवधि में ग्रोथ के लिए म्यूचुअल फंड में लगाया जा सकता है। इस तरह निवेशक सुरक्षा और बेहतर रिटर्न दोनों का संतुलन बना सकता है।
