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UP में Rent Agreement बनवाना हुआ सस्ता! सरकार ने घटाए Stamp Duty और Registration Charges

उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान या दूसरी प्रॉपर्टी किराये पर लेने वालों के लिए बड़ी राहत है। सरकार ने Rent Agreement पर लगने वाली Stamp Duty और Registration Fee के नियमों में बदलाव किया है। अब कई मामलों में पहले के मुकाबले काफी कम खर्च आएगा।

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UP में Rent Agreement बनवाना हुआ सस्ता

उत्तर प्रदेश में किराये का मकान, दुकान या दूसरी प्रॉपर्टी लेने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने Rent Agreement और Lease Agreement पर लगने वाली Stamp Duty और Registration Charges को कम करने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब किराये की अवधि और सालाना किराये के हिसाब से फिक्स शुल्क तय किया गया है। इससे खासकर लंबे समय के Rent Agreement कराने वाले मकान मालिकों और किरायेदारों को राहत मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य किरायेदारी के समझौतों को ज्यादा से ज्यादा औपचारिक और पंजीकृत बनाना है।

क्या है रेंट अग्रीमेंट के लिए नया नियम?

नई व्यवस्था में 10 साल तक की अवधि वाले Rent और Lease Agreement के लिए अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं। अगर किसी प्रॉपर्टी का औसत सालाना किराया 2 लाख रुपये तक है, तो एक साल तक के Agreement पर 1,000 रुपये की Stamp Duty लगेगी। वहीं, एक साल से ज्यादा और 5 साल तक की अवधि के लिए यह शुल्क 2,000 रुपये और 5 साल से ज्यादा से 10 साल तक के Agreement के लिए 4,000 रुपये होगा। खास बात यह है कि Registration Fee भी इसी के बराबर रखी गई है।

अगर सालाना औसत किराया 2 लाख रुपये से ज्यादा और 6 लाख रुपये तक है, तो एक साल तक के Agreement पर 3,000 रुपये Stamp Duty देनी होगी। 1 से 5 साल की अवधि के लिए यह 6,000 रुपये और 5 से 10 साल के Agreement के लिए 8,000 रुपये होगी। इन मामलों में Registration Fee भी इतनी ही होगी। यानी एक साल के Agreement के लिए कुल खर्च 6,000 रुपये होगा, जिसमें 3,000 रुपये Stamp Duty और 3,000 रुपये Registration Fee शामिल है।

कितनी लगेगी स्टैम्प ड्यूटी?

इसी तरह, अगर प्रॉपर्टी का औसत सालाना किराया 6 लाख रुपये से ज्यादा लेकिन 10 लाख रुपये तक है, तो एक साल तक के Agreement पर 4,500 रुपये Stamp Duty लगेगी। 1 से 5 साल के लिए यह शुल्क 10,000 रुपये और 5 से 10 साल के लिए 13,000 रुपये होगा। Registration Fee भी इन्हीं रकम के बराबर होगी। यानी 10 साल तक के Agreement में शुल्क अब तय स्लैब के हिसाब से लगेगा।

अगर सालाना किराया 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो भी राहत का प्रावधान है। ऐसे मामलों में पहले 10 लाख रुपये के सालाना किराये तक नई रियायती दरें लागू होंगी। 10 लाख रुपये से ऊपर की रकम पर मौजूदा शुल्क व्यवस्था लागू रहेगी। वहीं, Toll और Mining Lease को इस नई रियायती व्यवस्था से बाहर रखा गया है।

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब Rent Agreement को रजिस्टर्ड कराना पहले के मुकाबले सस्ता हो सकता है। उदाहरण के लिए, 2 लाख रुपये तक के सालाना किराये वाले एक साल के Agreement पर अब 1,000 रुपये Stamp Duty और 1,000 रुपये Registration Fee यानी कुल 2,000 रुपये खर्च होंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, पहले इसी तरह के Agreement पर कुल शुल्क करीब 10,000 रुपये तक हो सकता था।

किसको होगा फायदा?

सरकार का मानना है कि शुल्क कम होने से ज्यादा मकान मालिक और किरायेदार अपने Agreement को औपचारिक रूप से रजिस्टर्ड करा सकेंगे। इससे किराया, Agreement की अवधि और दोनों पक्षों की शर्तों का आधिकारिक रिकॉर्ड रहेगा। भविष्य में किरायेदारी को लेकर विवाद होने पर यह दस्तावेज काफी उपयोगी हो सकता है। उत्तर प्रदेश में एक साल से ज्यादा अवधि वाली Lease के Registration को लेकर पहले से नियम लागू हैं।

कुल मिलाकर, नए शुल्क से उत्तर प्रदेश में Rent Agreement बनवाने का खर्च कई मामलों में कम हो गया है। खासकर लंबे समय के Lease Agreement कराने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। हालांकि, Agreement बनवाने से पहले अपनी प्रॉपर्टी का सालाना किराया, अवधि और लागू शुल्क की ताजा जानकारी जरूर जांच लें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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