Early Retirement at 45: आज के समय में अधिकतर नौकरीपेशा लोग चाहते हैं कि वे 60 साल तक नौकरी करने के बजाय आर्थिक रूप से मजबूत बनकर समय से पहले रिटायर हो जाएं। हालांकि, अर्ली रिटायरमेंट का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब सही उम्र में सही निवेश की शुरुआत की जाए और समय-समय पर वित्तीय योजना की समीक्षा भी की जाए। इसके लिए केवल पैसा बचाना ही काफी नहीं है बल्कि यह भी जरूरी है कि व्यक्ति का निवेश उसके भविष्य के लक्ष्यों के हिसाब से बढ़ता रहे। 45 साल की उम्र अर्ली रिटायरमेंट (Early Retirement) की तैयार कैसी करनी चाहिए आइए समझते हैं-
मान लीजिए 45 साल का एक नौकरीपेशा व्यक्ति हर महीने करीब 3 लाख रुपये कमाता है। उसके मासिक खर्च लगभग 2 लाख रुपये हैं और उस पर किसी तरह का कर्ज भी नहीं है। इसके अलावा उसके पास एक कमर्शियल प्रॉपर्टी है, जिससे हर महीने 45,000 से 50,000 रुपये तक किराया भी मिलता है। ऐसे व्यक्ति के लिए अर्ली रिटायरमेंट की योजना बनाना बहुत हद तक आसान हो सकता है, लेकिन इसके लिए अनुशासित निवेश जरूरी होगा।
नियमित SIP और समय-समय पर बढ़ाना जरूरी
मान लीजिए इस व्यक्ति ने कुछ साल पहले 10,000 रुपये की SIP से शुरुआत की थी। बाद में जरूरत पड़ने पर कुछ निवेश निकालना पड़ा, लेकिन फिर उसने निवेश दोबारा शुरू किया और धीरे-धीरे SIP बढ़ाकर 80,000 रुपये प्रति माह कर दी। यही सबसे महत्वपूर्ण सीख है कि जैसे-जैसे आय बढ़े, निवेश भी बढ़ना चाहिए।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि अगर कोई निवेशक 80,000 रुपये की मासिक SIP जारी रखे और हर साल इसमें लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करे, तो लंबी अवधि में बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार किया जा सकता है।
केवल निवेश नहीं, लक्ष्य भी तय करें
अर्ली रिटायरमेंट की योजना बनाते समय केवल रिटायरमेंट के बारे में नहीं सोचना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई, घर बनाना या खरीदना, मेडिकल जरूरतें और अन्य बड़े खर्चों को भी पहले से योजना में शामिल करना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति भविष्य में अपने बच्चे को महंगी कार गिफ्ट करना चाहता है, तो विशेषज्ञों की सलाह यही रहती है कि पहले जरूरी वित्तीय लक्ष्यों को प्राथमिकता दें और उसके बाद ही ऐसे वैकल्पिक खर्चों पर विचार करें।
पोर्टफोलियो को रखें आसान
कई लोग अलग-अलग सलाह लेकर बहुत सारे म्यूचुअल फंड खरीद लेते हैं। इससे निवेश बिखर जाता है और उसे ट्रैक करना भी मुश्किल हो जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति के पास 17 अलग-अलग म्यूचुअल फंड स्कीम हैं, तो इसे बहुत ज्यादा माना जाता है। बेहतर यही होता है कि केवल जरूरत के अनुसार सीमित और अच्छी गुणवत्ता वाले म्यूचुअल फंड चुने जाएं। इससे पोर्टफोलियो को समझना और समय-समय पर उसकी समीक्षा करना आसान रहता है।
