देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। सरकार द्वारा प्रस्तावित 'नए वेज कोड' (New Wage Code) के लागू होने के साथ ही कर्मचारियों की सैलरी, काम के घंटे और ओवरटाइम के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहे हैं। इस नए कानून का सबसे शानदार हिस्सा 'ओवरटाइम' (Overtime) से जुड़ा है। अब तक कंपनियों में ओवरटाइम के नियम काफी उलझे हुए थे और अक्सर छोटे-मोटे एक्स्ट्रा काम के लिए कोई भुगतान नहीं मिलता था। लेकिन नए वेज कोड के तहत, अगर कोई कर्मचारी अपनी शिफ्ट से महज 15 मिनट भी ज्यादा काम करता है, तो कंपनी को उसे ओवरटाइम देना अनिवार्य होगा।
15 मिनट का नया 'ओवरटाइम' नियम
मौजूदा कानूनों के अनुसार, अक्सर आधे घंटे से कम के अतिरिक्त काम को ओवरटाइम की श्रेणी में नहीं गिना जाता था। कई बार कर्मचारी ऑफिस में 20-25 मिनट एक्स्ट्रा रुकते थे, लेकिन उसका उन्हें कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलता था। नए वेज कोड में इस विसंगति को दूर किया गया है। अब अगर कोई कर्मचारी अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद 15 से 30 मिनट तक भी अतिरिक्त काम करता है, तो उसे पूरे आधे घंटे का ओवरटाइम माना जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस ओवरटाइम के लिए कर्मचारी को उसकी सामान्य सैलरी की दर से 'दोगुना' भुगतान (Double Salary) किया जाएगा। यानी, एक्स्ट्रा मेहनत का अब पाई-पाई हिसाब होगा।
इन-हैंड सैलरी और पीएफ पर असर
नए वेज कोड का असर सिर्फ ओवरटाइम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी 'टेक-होम' सैलरी के ढांचे को भी बदल देगा। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी का 'बेसिक पे' (Basic Salary) उसकी कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि आपके भत्ते (Allowances) जैसे HRA आदि कुल सैलरी के आधे से ज्यादा नहीं हो सकते। बेसिक सैलरी बढ़ने का सीधा असर आपके पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी के योगदान पर पड़ेगा। चूंकि पीएफ बेसिक सैलरी पर कटता है, इसलिए आपका पीएफ फंड पहले के मुकाबले काफी बड़ा हो जाएगा, जो भविष्य के लिए एक अच्छी बचत है। हालांकि, इसकी वजह से आपकी हाथ में आने वाली सैलरी (In-hand Salary) में थोड़ी कटौती हो सकती है।
काम के घंटे और छुट्टियां
नए वेज कोड में काम के घंटों को लेकर भी लचीलापन देने की बात कही गई है। कंपनियों को यह विकल्प मिल सकता है कि वे अपने कर्मचारियों से दिन में 12 घंटे तक काम करवा सकें, लेकिन ऐसी स्थिति में उन्हें सप्ताह में कम से कम 3 दिन की छुट्टी (3-Day Week Off) देनी होगी। यानी, कुल वर्किंग आवर्स सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा नहीं होने चाहिए। इसके अलावा, साल भर की बची हुई छुट्टियों (Earned Leaves) को लेकर भी नियम आसान किए जा रहे हैं। अब कर्मचारी साल के अंत में अपनी बची हुई छुट्टियों के बदले पैसा लेने की मांग पहले से ज्यादा आसानी से कर सकेंगे।
कंपनियों के लिए बढ़ेगी जवाबदेही
यह नया कानून निजी क्षेत्र (Private Sector) की कंपनियों के लिए जवाबदेही बढ़ाएगा। अब तक कई कंपनियां कर्मचारियों से बिना किसी रिकॉर्ड के एक्स्ट्रा काम करवाती थीं, लेकिन अब 15 मिनट का रिकॉर्ड भी डिजिटल तौर पर मेंटेन करना पड़ सकता है। सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों के शोषण को रोकना और उन्हें उनकी मेहनत का सही हक दिलाना है। हालांकि, कंपनियों के लिए लेबर कॉस्ट बढ़ने की संभावना है, क्योंकि उन्हें अब ओवरटाइम और पीएफ में ज्यादा योगदान देना होगा।
