Dollar Vs Rupee: ईरान युद्ध का हल नहीं निकलने और कच्चे तेल की कीमत में उछाल से रुपये पर दबाब बढ़ा है। इसके चलते रुपये फिर टूट रहा है। आज एक्सचेंज मार्केट में 1 डॉलर की कीमत 94 रुपये के पार पहुंच गई है। बता दें कि रुपया लगातार चौथे सत्र में कमजोर रहा और एक महीने में दूसरी बार 94 के स्तर को पार कर गया है। आज कारोबार में 34 पैसे टूटकर 94.12 पर खुला। 1 बजे तक रुपया 94.08 पर ट्रेड कर रहा है। करेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि एशिया में शांति वार्ता में कोई प्रगति न होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से घरेलू मुद्रा दबाव में है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और अमेरिकी मुद्रा की वैश्विक मांग में वृद्धि के बीच विदेशी पूंजी की निकासी के कारण भी रुपये पर दबाव बना रहा।
आज लगातार चौथे दिन गिरावट
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में Rupee 94.04 प्रति डॉलर पर खुला। शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 94.12 पर आ गया जो पिछले बंद भाव से 34 पैसे की गिरावट दर्शाता है। रुपया बुधवार को 34 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.78 पर बंद हुआ था। रुपया लगातार तीसरे सत्र में गिरावट में रहा। पिछले दो सत्र में यह 53 पैसे टूटा है। घरेलू मुद्रा ने 23 मार्च को पहली बार 94 डॉलर प्रति डॉलर के स्तर को पार किया था। रुपया 30 मार्च को अपने अब तक के सबसे निचले अंतर-दिवसीय स्तर 95.22 पर पहुंचा था।
डॉलर इंडेक्स में तेजी
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.53 पर रहा।
घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 632.36 अंक या 0.81 प्रतिशत टूटकर 77,884.13 अंक पर जबकि निफ्टी 179.10 अंक या 0.73 प्रतिशत फिसलकर 24,198.90 अंक पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.37 प्रतिशत चढ़कर 103.31 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 2,078.36 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
RBI के कदम से थम गई थी गिरावट
27 मार्च को, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने निर्देश दिया था कि अधिकृत डीलर हर बिजनेस डे के आखिर में ऑनशोर डिलिवरेबल मार्केट में अपनी NOP-INR पोजीशन 100 मिलियन डॉलर के अंदर बनाए रखें। बैंकों को इसका पालन करने के लिए 10 अप्रैल, 2026 तक का समय दिया गया है। इससे बैंकों को डॉलर बेचना पड़ा। इस कदम से बाद रुपये में रिकवरी लौटी थी लेकिन एक बार फिर गिरावट बढ़ गई है।
