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Health Insurance में Deductible या Co-pay? किसमें जेब से कम जाएगा पैसा

स्वास्थ्य बीमा लेते समय 'डिडक्टिबल' और 'को-पे' ऐसे दो महत्वपूर्ण शब्द हैं जो आपके मेडिकल खर्चों को सीधे प्रभावित करते हैं। आइए बेहद आसान भाषा में समझें कि इनमें से किस विकल्प को चुनने पर आपकी जेब पर सबसे कम बोझ पड़ेगा।

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Health Insurance में Deductible या Co-pay?

जब हम अपने और अपने परिवार के लिए एक बेहतर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने निकलते हैं, तो हमें प्रीमियम के साथ-साथ कई तकनीकी शब्दों का सामना करना पड़ता है। इनमें 'डिडक्टिबल' (Deductible) और 'को-पेमेंट' या 'को-पे' (Co-pay) ऐसे दो अहम प्रावधान हैं जो सीधे तौर पर हमारे मेडिकल क्लेम और खर्चों को प्रभावित करते हैं। कई लोग कम प्रीमियम के चक्कर में बिना सोचे-समझे इन विकल्पों को चुन लेते हैं, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के समय उन्हें अपनी जेब से भारी रकम चुकानी पड़ सकती है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि इन दोनों में से किस विकल्प को चुनने पर आपकी जेब पर कम से कम बोझ पड़ेगा और आपकी वित्तीय सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित रह सकेगी।

को-पे क्या है?

सबसे पहले बात करते हैं 'को-पे' यानी सह-भुगतान की। यह एक ऐसा क्लॉज है जिसमें बीमा कंपनी के साथ-साथ पॉलिसीधारक भी इलाज के खर्च का एक निश्चित प्रतिशत अपनी जेब से भुगतान करने के लिए सहमत होता है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी पॉलिसी में 15% का को-पे तय है और आपका कुल मेडिकल बिल 1 लाख रुपये आता है, तो बीमा कंपनी 85,000 रुपये का भुगतान करेगी जबकि 15,000 रुपये आपको खुद देने होंगे। को-पे का मुख्य असर आपके सालाना प्रीमियम पर पड़ता है; यदि आप ज्यादा को-पे का विकल्प चुनते हैं, तो आपका प्रीमियम काफी कम हो जाता है। हालांकि, बड़े मेडिकल क्लेम के समय यह छोटा सा दिखने वाला प्रतिशत आपकी जेब पर एक बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है, क्योंकि क्लेम राशि जितनी बड़ी होगी, आपका हिस्सा भी उतना ही अधिक होता जाएगा।

डिडक्टिबल क्या है?

दूसरी तरफ, 'डिडक्टिबल' एक निश्चित तयशुदा राशि होती है जिसे बीमा कवरेज शुरू होने से पहले पॉलिसीधारक को हर साल अपनी जेब से भरना ही होता है। मान लीजिए कि आपकी पॉलिसी में 10,000 रुपये का डिडक्टिबल तय है, तो अस्पताल के कुल बिल में से शुरुआती 10,000 रुपये का भुगतान आपको करना होगा और उसके ऊपर का सारा खर्च बीमा कंपनी उठाएगी। डिडक्टिबल आमतौर पर सालाना आधार पर काम करता है, जबकि को-पे हर बार किए जाने वाले क्लेम पर लागू होता है। यदि आप स्वैच्छिक डिडक्टिबल (Voluntary Deductible) का विकल्प चुनते हैं, तो बीमा कंपनियां आपको काफी कम प्रीमियम ऑफर करती हैं, लेकिन इसके लिए आपको अपनी जोखिम उठाने की क्षमता का पूरा आंकलन करना आवश्यक होता है।

दोनों में से क्या है बेहतर?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि दोनों में से बेहतर विकल्प कौन सा है और किसमें जेब से कम पैसा जाएगा? यदि आप पूरी तरह से सुरक्षित रहना चाहते हैं और अस्पताल के समय अचानक आने वाले बड़े खर्चों से बचना चाहते हैं, तो ऐसे प्लान चुनें जिनमें को-पे या डिडक्टिबल या तो शून्य हो या फिर बहुत कम हो। हालांकि, यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, युवा हैं और केवल कम प्रीमियम का लाभ उठाने के लिए थोड़ा जोखिम उठाना चाहते हैं, तो आप अपनी जरूरत के अनुसार चुनाव कर सकते हैं। कुल मिलाकर, सिर्फ कम प्रीमियम के लालच में आकर भारी डिडक्टिबल या उच्च को-पे चुनना हमेशा समझदारी नहीं होती, क्योंकि एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी के वक्त थोड़ी सी बचत आपके लिए भारी वित्तीय तनाव का कारण बन सकती है। इसलिए पॉलिसी लेते समय अपनी हेल्थ हिस्ट्री और बजट दोनों का संतुलन बनाकर ही सही निर्णय लें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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