भारत के पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए नेपाल हमेशा से एक पसंदीदा पड़ोसी गंतव्य रहा है। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं या अचानक आई बाढ़ जैसी त्रासदियों में जब विदेशी धरती पर किसी भारतीय नागरिक की जान चली जाती है या वे लापता हो जाते हैं, तो उनके परिवार के सामने एक बड़ा कानूनी और वित्तीय प्रश्न खड़ा हो जाता है। लोग अक्सर यह सोचने लगते हैं कि भारत में खरीदी गई टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा क्या विदेश में हुई मौत की स्थिति में नॉमिनी को मिल पाएगा या नहीं।
क्या हैं बीमा के नियम?
बीमा नियमों के अनुसार, सिर्फ इसलिए कि किसी पॉलिसीधारक की मृत्यु भारत के बाहर हुई है, उसका टर्म इंश्योरेंस क्लेम खारिज नहीं हो जाता। अधिकांश भारतीय टर्म इंश्योरेंस पॉलिसियां वैश्विक कवरेज (Global Coverage) प्रदान करती हैं, यानी पॉलिसीधारक की मृत्यु दुनिया के किसी भी कोने में हो, नॉमिनी सम एश्योर्ड का हकदार होता है। हालांकि, विदेश में हुई मौत के मामलों में क्लेम की प्रक्रिया थोड़ी अलग और सख्त हो जाती है। इसके लिए बीमा कंपनी को मृत्यु की प्रामाणिकता और कारण की पुष्टि करने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किया गया मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate), पुलिस रिपोर्ट, मृतक का पासपोर्ट और नॉमिनी के पहचान पत्र जैसे अतिरिक्त दस्तावेजों के अटेस्टेशन की आवश्यकता होती है।
कब अटकता है मामला?
सबसे पेचीदा स्थिति तब उत्पन्न होती है जब प्राकृतिक आपदा में व्यक्ति लापता हो जाता है और उसका शव बरामद नहीं हो पाता। आमतौर पर भारतीय कानून (भारतीय साक्ष्य अधिनियम) के तहत किसी भी लापता व्यक्ति को कानूनी रूप से मृत घोषित करने के लिए 7 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है। लेकिन भीषण आपदाओं के मामलों में यह नियम हमेशा बाधा नहीं बनता। ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में सरकार और बीमा नियामक (IRDAI) विशेष दिशानिर्देश जारी करते हैं। इसके तहत आधिकारिक मिसिंग लिस्ट, स्थानीय दूतावास (Indian Embassy) की रिपोर्ट और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर 7 साल का इंतजार किए बिना भी क्लेम की प्रक्रिया का त्वरित निपटारा किया जा सकता है।
यदि ऐसी कोई दुखद घटना घटती है, तो नॉमिनी को बिना देर किए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए। सबसे पहले स्थानीय पुलिस या आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधना चाहिए। इसके साथ ही, तुरंत अपनी बीमा कंपनी को घटना की सूचना देकर आवश्यक प्रारंभिक कागजात जमा कर देने चाहिए ताकि क्लेम फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो सके।
क्लेम मिलने में किसी भी तरह की रुकावट से बचने के लिए यह बेहद जरूरी है कि घटना के वक्त पॉलिसी चालू (Active) हो। यदि प्रीमियम न भरने की वजह से पॉलिसी लैप्स हो चुकी हो, या बीमा लेते समय कोई गंभीर चिकित्सीय जानकारी छिपाई गई हो, तो बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। इसलिए पॉलिसी की शर्तों को ध्यान से पढ़ना और सभी आधिकारिक दस्तावेज सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
