Dividend Stock: अगर कोई आपसे कहे कि सिर्फ ₹10.50 के शेयर पर एक साल में ₹92.50 कैश डिविडेंड मिला है, तो शायद आपको यकीन न हो। लेकिन भारत की दिग्गज हैंड टूल्स निर्माता Taparia Tools ने अपने शेयरधारकों को पिछले 12 महीनों में इतना ही कैश डिविडेंड दिया है। मौजूदा शेयर भाव के हिसाब से इसका Trailing Dividend Yield करीब 881% बैठता है, जो भारतीय शेयर बाजार में बेहद दुर्लभ है। हालांकि, इस चौंकाने वाले डिविडेंड के पीछे की पूरी कहानी समझना जरूरी है। Taparia Tools ने पिछले 12 महीनों में तीन बार डिविडेंड घोषित किया है। यानी जिसने इन तीनों डिविडेंड के लिए पात्रता हासिल की, उसे कुल ₹92.50 प्रति शेयर का कैश रिटर्न मिला।
| एक्स-डेट | डिविडेंड | प्रकार |
|---|---|---|
| 22 जुलाई 2026 | ₹35.00 | Final |
| 19 नवंबर 2025 | ₹32.50 | Interim |
| 29 जुलाई 2025 | ₹25.00 | Final |
| कुल | ₹92.50 | — |
आखिर कंपनी करती क्या है?
1969 में स्थापित Taparia Tools भारत की प्रमुख हैंड टूल्स निर्माता कंपनियों में से एक है। कंपनी स्पैनर, प्लायर, स्क्रूड्राइवर, हैमर, टॉर्क रिंच, सॉकेट सेट, एलन की, पाइप रिंच, हैक्सॉ ब्लेड और अन्य इंडस्ट्रियल व ऑटोमोबाइल हैंड टूल्स का निर्माण और ट्रेडिंग करती है। इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट महाराष्ट्र के नासिक और गोवा में हैं। कंपनी के देशभर में 800 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर हैं और इसके उत्पाद अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्वीडन, यूएई, मैक्सिको, थाईलैंड, केन्या और श्रीलंका समेत कई देशों में निर्यात किए जाते हैं। FY26 में कंपनी की कुल आय का लगभग 68% ट्रेडिंग और 30% मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस से आया, जिससे इसकी मजबूत वितरण क्षमता और व्यापक बाजार मौजूदगी का पता चलता है। इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नासिक और गोवा में हैं। कंपनी के भारत में 800 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर हैं और यह अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्वीडन, यूएई, मेक्सिको, अर्जेंटीना, थाईलैंड, श्रीलंका सहित कई देशों में निर्यात करती है।
₹1,000 करोड़ का कारोबार पार
Taparia Tools का बिजनेस लगातार मजबूत हुआ है। Taparia Tools का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में पहली बार ₹1,023 करोड़ का सालाना राजस्व दर्ज किया, जो एक साल पहले ₹913 करोड़ था। यानी एक साल में बिक्री में करीब 12% की बढ़ोतरी हुई। वहीं पिछले पांच वर्षों में कंपनी का कारोबार ₹668 करोड़ (FY22) से बढ़कर ₹1,023 करोड़ (FY26) तक पहुंच गया। FY26 में पहली बार बिक्री ₹1,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।
| वित्त वर्ष | Revenue |
|---|---|
| FY22 | ₹668 करोड़ |
| FY23 | ₹764 करोड़ |
| FY24 | ₹829 करोड़ |
| FY25 | ₹913 करोड़ |
| FY26 | ₹1,023 करोड़ |
मुनाफा भी लगातार बढ़ रहा
पिछले 5 वर्षों में कंपनी ने करीब 26% CAGR से मुनाफा बढ़ाया है, जबकि पिछले एक साल में भी Profit Growth करीब 24% रही। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ ₹152 करोड़ रहा, जो एक साल पहले ₹123 करोड़ था। पिछले पांच वर्षों में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹65 करोड़ (FY22) से बढ़कर ₹152 करोड़ (FY26) हो गया है।
कंपनी की सबसे बड़ी ताकत
Taparia Tools सिर्फ डिविडेंड देने वाली कंपनी नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनी भी है। Taparia Tools की सबसे बड़ी ताकत इसका मजबूत फंडामेंटल और लगातार कैश कमाने वाला बिजनेस है। कंपनी लगभग कर्ज मुक्त है और उस पर कुल उधारी सिर्फ ₹1.64 करोड़ है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने ₹137 करोड़ का ऑपरेटिंग कैश फ्लो और ₹132 करोड़ का फ्री कैश फ्लो पैदा किया। कंपनी पिछले कई वर्षों से मुनाफे का बड़ा हिस्सा डिविडेंड के रूप में शेयरधारकों को लौटाती रही है और इसका डिविडेंड पेआउट रेशियो करीब 63.5% है। यही वजह है कि मजबूत कमाई, बेहतर नकदी प्रवाह और उदार डिविडेंड नीति Taparia Tools को अपने सेक्टर की अलग पहचान दिलाती है।
शेयरहोल्डिंग कैसी है?
Taparia Tools में प्रमोटरों की हिस्सेदारी काफी मजबूत है। जून 2026 तक कंपनी में प्रमोटरों के पास 71.53% हिस्सेदारी थी, जबकि पब्लिक शेयरधारकों के पास 28.45% हिस्सेदारी थी। पिछले कुछ तिमाहियों में प्रमोटर होल्डिंग बढ़ी है, जो कंपनी के भविष्य को लेकर उनके भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, पब्लिक हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने और शेयर में बेहद कम ट्रेडिंग होने की वजह से इसकी लिक्विडिटी काफी सीमित रहती है। यही कारण है कि कंपनी के मजबूत फंडामेंटल के बावजूद शेयर का बाजार भाव उसकी वास्तविक वैल्यू को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता।
इतना सस्ता क्यों दिख रहा शेयर?
यही Taparia Tools की सबसे बड़ी पहेली है। Taparia Tools का शेयर ₹10.50 पर जरूर दिख रहा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी का कमजोर बिजनेस नहीं, बल्कि बेहद कम लिक्विडिटी है। इस शेयर में रोजाना लगभग कोई ट्रेडिंग नहीं होती और कई बार दिनों तक एक भी सौदा नहीं होता। ऐसे में स्क्रीन पर दिखने वाला भाव सिर्फ Last Traded Price (LTP) होता है, जो कंपनी की वास्तविक वैल्यू को नहीं दर्शाता। यही कारण है कि कंपनी का सालाना कारोबार ₹1,000 करोड़ से ज्यादा, शुद्ध मुनाफा ₹152 करोड़, ROE करीब 35% और मजबूत डिविडेंड रिकॉर्ड होने के बावजूद शेयर का भाव बेहद कम दिखाई देता है। यानी Taparia Tools का मामला सामान्य शेयरों जैसा नहीं है, बल्कि कम ट्रेडिंग और कमजोर Price Discovery की वजह से इसकी कीमत असामान्य रूप से कम नजर आती है।
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