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Diesel Price Hike: डीजल हुआ महंगा, किसानों की लागत बढ़ी! खेती से लेकर मंडी तक कितना पड़ेगा असर

Diesel Price Hike: डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ गई है। ट्रैक्टर, सिंचाई और फसल परिवहन खर्च बढ़ने से किसानों की कमाई प्रभावित होगी और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है।

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डीजल हुआ महंगा, खेती की लागत बढ़ेगी, किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Diesel Price Hike : देश में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर अब किसानों की जेब पर (farmers cost increase) दिखाई देने लगेगा। खेती-किसानी का बड़ा हिस्सा आज भी डीजल पर निर्भर है। खेत की जुताई से लेकर सिंचाई, फसल कटाई और मंडी तक अनाज पहुंचाने में डीजल का उपयोग होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने से किसानों की उत्पादन लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो इसका असर फसलों की कीमतों और आम लोगों की रसोई तक पहुंच सकता है।

ट्रैक्टर और कृषि मशीनों का खर्च बढ़ा

खेती में सबसे ज्यादा उपयोग ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनों का होता है। अधिकांश ट्रैक्टर डीजल से चलते हैं। डीजल के दाम बढ़ने से खेत की जुताई, बुवाई और कटाई का खर्च बढ़ जाएगा। पहले जहां किसान एक एकड़ खेत की जुताई कम खर्च में कर लेते थे, अब उसी काम के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे। जिन किसानों के पास खुद का ट्रैक्टर नहीं है, उन्हें किराये पर मशीनें लेने में भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इसका असर छोटे और मध्यम किसानों पर ज्यादा पड़ सकता है।

सिंचाई पर भी बढ़ा बोझ

देश के कई इलाकों में किसान डीजल पंप के जरिए खेतों की सिंचाई करते हैं। खासकर गांवों में जहां बिजली की सुविधा सीमित है, वहां डीजल इंजन ही खेती का सहारा बने हुए हैं। डीजल महंगा होने से सिंचाई की लागत बढ़ जाएगी। धान, गन्ना और सब्जियों जैसी फसलों में बार-बार पानी की जरूरत होती है, इसलिए इन फसलों की लागत और ज्यादा बढ़ सकती है। किसानों का कहना है कि पहले ही खाद, बीज और कीटनाशक महंगे हो चुके हैं, अब डीजल की मार ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

मंडी तक फसल पहुंचाना होगा महंगा

फसल तैयार होने के बाद उसे मंडी तक पहुंचाने में भी डीजल की बड़ी भूमिका होती है। ट्रक, पिकअप और छोटे मालवाहक वाहन डीजल से चलते हैं। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ेगा क्योंकि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा किराया देना होगा। कई व्यापारियों ने भी माल ढुलाई दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। इससे फल, सब्जियां और अनाज जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

खेती की लागत बढ़ने से घट सकता है मुनाफा

किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों का उचित दाम नहीं मिल पा रहा। डीजल महंगा होने से उत्पादन खर्च बढ़ेगा, जबकि बाजार में फसल का भाव अक्सर स्थिर रहता है। ऐसे में किसानों का मुनाफा घट सकता है। कृषि एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो कई किसान खेती से दूरी बनाने को मजबूर हो सकते हैं।

सरकार से राहत की उम्मीद

किसानों ने सरकार से डीजल पर राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि कृषि कार्यों के लिए डीजल पर विशेष सब्सिडी दी जानी चाहिए ताकि खेती की लागत कम हो सके। कई किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो खेती करना और मुश्किल हो जाएगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को किसानों के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे सोलर पंप और बिजली आधारित कृषि मशीनों को बढ़ावा देना चाहिए। इससे किसानों की डीजल पर निर्भरता कम होगी और लागत में भी राहत मिल सकती है।

आम आदमी पर भी पड़ेगा असर

डीजल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। जब खेती और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे तो बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। यानी आने वाले समय में आम लोगों को सब्जियां, फल और अनाज खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इस तरह डीजल की महंगाई का असर खेत से लेकर रसोई तक महसूस किया जाएगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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