यूं तो भारत का प्रत्येक त्योहार अपने आप में विशेष महत्व रखता है, लेकिन धनतेरस की प्रमुखता कुछ अलग ही है। इस दिन पूरे देश में लोग सोना–चांदी, बर्तन एवं रसोई की वस्तुएं खरीदते हैं जिन्हें धनतेरस पर खरीदना शुभ माना गया है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु में तेरह गुना वृद्धि होती है। देश में धनतेरस के मौके पर करीब 25 टन सोने की बिक्री होने का अनुमान है, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग ₹32,500 करोड़ आंकी गई है। इस दौरान देशभर के महानगरों से लेकर छोटे-छोटे शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। दिल्ली में शुक्रवार शाम से ही मार्केट पूरी तरह सज चुका था और खरीदारी के लिए ग्राहकों की भीड़ लगी रही। वहीं मुंबई और कोलकाता में भी सोने-चांदी खरीदने वालों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
1 लाख करोड़ का होगा कारोबार
कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री तथा दिल्ली के चाँदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि धनतेरस पर आज पूरे देश में सोने चांदी को मिलाकर अन्य महत्वपूर्ण धनतेरस संबंधित वस्तुओं का कुल व्यापार का अनुमान 1 लाख करोड़ रुपए का है।कैट एवं इसके ज्वैलरी चैप्टर ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ( एआईजेजीएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा की पिछले दो दिनों में और जिस प्रकार से ग्राहक सोने चांदी की दुकानों पर उमड़े हैं, उसको देखते हुए एक अनुमान के अनुसार देश भर में आज धनतेरस पर सोने चाँदी के गहनों, सिक्को एवं अन्य वस्तुओं का कारोबार 60 हज़ार करोड़ रुपए पार कर गया वहीं दिल्ली के बाजारों में यह कारोबार 10 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक हुआ जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक हुआ।
एक साल में इतना महंगा हुआ सोना चांदी
पिछले वर्ष दीपावली के दौरान सोने का भाव लगभग ₹80,000 प्रति 10 ग्राम था, जबकि इस वर्ष बढ़कर ₹1,30,000 प्रति 10 ग्राम को पार कर गया है यानी करीब 60% की वृद्धि। इसी प्रकार चांदी की कीमतें 2024 में ₹98,000 प्रति किलोग्राम थीं, जो अब ₹1,80,000 प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई हैं, यानी लगभग 55% की बढ़ोतरी। इन बढ़ी कीमतों के चलते निवेशक ग्राहकों ने बाज़ार में सामान ख़रीदा क्योंकि सोने चांदी को निवेश हेतु सबसे सुरक्षित वस्तु माना जाता है वहीं आम ग्राहकों ने हल्के वजन के गहनों को प्राथमिकता दी।
खंडेलवाल ने कहा कि धनतेरस पर तांबा, चांदी या स्टील के नए बर्तन खरीदना, रसोई का अन्य सामान तथा उपकरण लेना शुभ माना जाता है, जो समृद्धि और शुद्धता का प्रतीक हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार धनतेरस पर झाड़ू खरीदना दरिद्रता को दूर करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा एवं मां लक्ष्मी का आगमन सुनिश्चित करता है। आधुनिक युग में लोग मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसी वस्तुएं भी शुभ मानकर खरीदते हैं, जो उन्नति और समृद्धि के प्रतीक बन चुके हैं।
रिकॉर्ड बिक्री का अनुमान
खंडेलवाल ने कहा की इस धनतेरस पर आज बाज़ारों में रिकॉर्ड बिक्री हुई जिसमें सोने चांदी के अलावा मुख्य रूप से बर्तन एवं रसोई का सामान एवं उपकरण 15 हज़ार करोड़ रुपए, इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिकल का सामान 10 हज़ार करोड़ रुपए, सजावट, दीपक एवं पूजन सामग्री 3 हज़ार करोड़ रुपए तथा 12 हज़ार करोड़ रुपए ड्राई फ्रूट, फल, मिठाई, वस्त्र, वाहन आदि ख़रीदने में हुए खर्च का अनुमान है। कुल मिलाकर धनतेरस पर देश भर में 1 लाख करोड़ रुपए के बड़े व्यापार का अनुमान है।
GST कटौती का असर
खंडेलवाल ने बताया कि इस वर्ष व्यापार वृद्धि के प्रमुख कारणों में जीएसटी दरों में बड़े पैमाने पर की गई कटौती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “स्वदेशी अपनाओ” के आह्वान का गहरा प्रभाव देखा गया है। उपभोक्ता अब स्थानीय एवं देशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे देश के छोटे व्यापारियों और निर्माताओं को सीधा लाभ मिला है।
उन्होंने कहा कि इस बार त्योहारी सीजन में न केवल मॉल्स बल्कि स्थानीय बाजार, सर्राफा गलियां, बर्तन मंडियां, इलेक्ट्रॉनिक मार्केट और खुदरा दुकानों में भी असाधारण उत्साह देखने को मिला। खंडेलवाल ने कहा कि धनतेरस और दीपावली का यह पर्व न केवल आर्थिक गतिविधि का प्रतीक है बल्कि यह आस्था, समृद्धि और स्वदेशी संकल्प का उत्सव भी बन गया है, जिसने भारत की खुदरा अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है।
