Delhi Liquor Sales : दिल्ली में इस साल दिवाली के दौरान शराब की खुदरा बिक्री ने नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में त्योहार से पहले पखवाड़े (15 दिन) के दौरान शराब की बिक्री से सरकार को लगभग 600 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 प्रतिशत अधिक है।
पखवाड़े में 594 करोड़ रुपये की बिक्री
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिवाली से पहले के 15 दिनों में सरकारी शराब दुकानों से 594 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई। पिछले वर्ष 2024 में इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 516 करोड़ रुपये था। अधिकारी के अनुसार इस वर्ष दिवाली से पहले शराब की कुल बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे आबकारी विभाग के राजस्व संग्रह में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है।
वित्त वर्ष की पहली छमाही में 4,192 करोड़ रुपये का राजस्व
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में दिल्ली सरकार को उत्पाद शुल्क और वैट (मूल्य वर्धित कर) से कुल 4,192.86 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 3,731.79 करोड़ रुपये था। इससे यह साफ है कि शराब की मांग और बिक्री में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे सरकार की आय में भी सकारात्मक असर पड़ रहा है।
राजस्व लक्ष्य पार होने की उम्मीद
आबकारी विभाग का कहना है कि दिवाली के दौरान हुई रिकॉर्ड बिक्री से यह संभावना मजबूत हो गई है कि चालू वित्त वर्ष में 6,000 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को पार किया जा सकेगा। अधिकारी ने बताया कि नए साल और अन्य उत्सवों के दौरान शराब की बढ़ती मांग से राजस्व में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
बजट लक्ष्य में किया गया संशोधन
दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में उत्पाद शुल्क से 7,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा था, जिसे बाद में संशोधित कर 6,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा रफ्तार के आधार पर यह संशोधित लक्ष्य न केवल पूरा होगा, बल्कि उससे अधिक राजस्व भी प्राप्त किया जा सकता है।
त्योहारों ने दी अर्थव्यवस्था को रफ्तार
विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली जैसे त्योहार न केवल उपभोक्ता मांग को बढ़ाते हैं, बल्कि राज्य सरकारों की आमदनी में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। दिल्ली में बढ़ी शराब बिक्री से यह साफ झलकता है कि त्योहारों का सीधा असर अर्थव्यवस्था और कर राजस्व दोनों पर पड़ता है।
