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डेट म्युचुअल फंड बनाम बैंक एफडी,जानें अप्रैल से कहां ज्यादा मिलेगा रिटर्न

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Mar 27, 2023, 12:21 PM IST

Debt Mutual Fund Vs Bank FD: डेट म्युचुअल फंड और बैंक फिक्स डिपॉजिट में सबसे बड़ा अंतर निवेश के तरीकों का है । डेट म्युचुअल फंड के जरिए निवेशकों का पैसा जहां इक्विटी में लगता है, वहीं बैंक एफडी में पैसा आरबीआई द्वारा आधिसूचित बैंक में निवेश होता है।

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बैंक एफडी और डेट म्युचुअल फंड में कौन बेहतर

Photo : BCCL

Debt Mutual Fund Vs Bank FD: एक अप्रैल से डेट म्युचुअल फंड में निवेश के नियम बदल रहे है। अब तीन साल से अधिक समय के निवेश पर ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा। नए नियम उन डेट म्युचुअल फंड पर लागू होंगे, जिन्होंने इक्विटी मार्केट में 35 फीसदी से कम निवेश कर रखा है। इसके तहत निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। इस कारण निवेशकों को पहले से ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा। सरकार इस कदम के जरिए बैंक एफडी और डेट म्युचुअल फंड को समान स्तर पर लाना चाहती है। क्योंकि अभी इंडेक्सेशन का फायदा मिलने से बैंक एफडी की तुलना में डेट म्युचुअल फंड रिटर्न के मामले में आकर्षक बने हुए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नए नियम के बाद बैंक एफडी और डेट म्युचुअल फंड के रिटर्न एक जैसे हो जाएंगे।

अभी डेट म्युचुअल फंड और बैंक एफडी में क्या अंतर

डेट म्युचुअल फंड और फिक्स डिपॉजिट में सबसे बड़ा अंतर निवेश के तरीकों का है । डेट म्युचुअल फंड के जरिए निवेशकों का पैसा जहां इक्विटी में लगता है, वहीं बैंक एफडी में पैसा आरबीआई द्वारा आधिसूचित बैंक में निवेश होता है।

डेट म्युचुअल फंड में म्युचुअल फंड हाउस निवेशकों का पैसा फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज जैसे कि सरकारी प्रतिभूतियों, करपोरेट बॉन्ड, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजट और आदि में निवेश करते है। वहीं बैंक की एफडी में निवेशकों को इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव का रिस्क नहीं होता है।

सूचकांकबैंक फिक्सड डिपॉजिटडेट म्युचुअल फंड
रिटर्नरिटर्न फिक्स (बैंक अगर एफडी करते समय 7 फीसदी तय करता है तो उतना ब्याज मिलना तय है)इक्विटी मार्केट के आधार पर उतार-चढ़ाव
रिस्कजोखिम नहींजोखिम बना रहता है
विदड्रॉलसमय से पहले पैसा निकालने पर बैंक पेनॉल्टी लेते हैं। (हालांकि बैंक इसमें छूट भी दे सकता है)बिना पेनॉल्टी के कभी भी पैसा निकाला जा सकता है, हालांकि कुछ फंड में तय अवधि के कारण निवेशक को एक्जिट लोड चार्ज देना पड़ता है।
टैक्सएक वित्त वर्ष में ब्याज 40 हजार से ज्यादा तो टैक्स देनदारी , वरिष्ठ नागरिकों को 50 हजार पर टैक्स देना पड़ता हैअब पैसा निकालने पर निवेशक के टैक्सेबल इनकम के आधार पर टैक्स देनदारी बनेगी।
निवेस का तरीकाSIP भी कर सकते हैं।एकमुश्त रकम
डिविडेंडनहींहां
इंडेक्सेशन का फायदानहीं अब नहीं

डेट म्युचुअल फंड क्यों बने आकर्षक

डेट म्युचुअल फंड के आकर्षक होने की सबसे बड़ी वजह इंडेक्सेशन का फायदा था। क्योंकि इसके जरिए निवेशकों पर महंगाई से होने वाले निगेटिव इम्पैक्ट का असर नहीं होता था।

महंगाईबैंक एफडी पर ब्याजबैंक का रियल रिटर्नडेट म्युचुअल फंड
6 फीसदी8 फीसदी 2 फीसदीइंडेक्सेशन की वजह से बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा रिटर्न
प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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