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DDA फ्लैट्स में रहने वालों के लिए गुड न्यूज, चुटकियों में दूर होंगी समस्याएं, शुरू हुई ये व्यवस्था

DDA Flats: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपने फ्लैट्स में रहने वाले लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए नई पहल शुरू की है। अब निवासी बार-बार दफ्तर के चक्कर नहीं लगाएंगे। इसके लिए DDA हाउसिंग विभाग ने जनसुनवाई सिस्टम लागू किया है। हाउसिंग डिप्टी डायरेक्टर चिन्मय चक्रवर्ती ने इस व्यवस्था के संबंध में सर्कुलर जारी किया है।

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हर बुधवार DDA में जनसुनवाई: फ्लैट्स की समस्याओं का मिलेगा फौरन समाधान (तस्वीर-x)

DDA Flats: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपने फ्लैट्स में रहने वाले लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। अब DDA फ्लैट्स से जुड़ी शिकायतों के लिए लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए DDA हाउसिंग विभाग की ओर से एक नया जनसुनवाई सिस्टम शुरू किया जा रहा है। इस संबंध में हाउसिंग डिप्टी डायरेक्टर चिन्मय चक्रवर्ती ने एक सर्कुलर जारी किया है।

हर हफ्ते होगी जनसुनवाई

जारी सर्कुलर के अनुसार DDA फ्लैट्स की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए हर हफ्ते बुधवार को जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। यह जनसुनवाई दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक होगी। इस दौरान लोग सीधे अपनी समस्याएं संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। इसका मकसद यह है कि स्थानीय स्तर पर ही शिकायतों का समाधान हो सके।

साइट इंजिनियर करेंगे शिकायतों की सुनवाई

इस नई व्यवस्था में साइट इंजिनियर की अहम भूमिका होगी। वही जनसुनवाई करेंगे और लोगों की समस्याओं को सुनेंगे। इसके साथ ही DDA फ्लैट्स के विभिन्न पॉकेट्स के इंचार्ज अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। जनसुनवाई में खास तौर पर फ्लैट्स की मेंटिनेंस, हैंडलिंग, सिक्योरिटी, और हाउसिंग पॉकेट से जुड़े अन्य मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा।

रिकॉर्ड रखना होगा अनिवार्य

DDA ने निर्देश दिया है कि जनसुनवाई के दौरान जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उनका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसमें शिकायत करने वाले व्यक्ति का नाम, समस्या का विवरण और समाधान की स्थिति शामिल होगी। साइट इंजिनियर और पॉकेट इंचार्ज यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज किया जाए और उन पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई हो।

समय पर होगा समस्याओं का समाधान

जनसुनवाई में सामने आई समस्याओं का समाधान तय समय सीमा के भीतर करना होगा। इसके लिए साइट इंजिनियर जिम्मेदार होंगे। DDA ने अपने सभी जोन के चीफ इंजिनियरों को निर्देश दिए हैं कि वे इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू कराएं और नियमित निगरानी रखें, ताकि लोगों को वास्तविक राहत मिल सके।

क्यों पड़ी नई व्यवस्था की जरुरत

बीते कुछ वर्षों में DDA फ्लैट्स में रहने वाली RWA (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) की ओर से सबसे ज्यादा शिकायतें मेंटिनेंस और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी आई हैं। पुराने फ्लैट्स होने के कारण पानी की लाइन, सीवर, लिफ्ट, सड़क, बिजली और सुरक्षा जैसी समस्याएं लगातार सामने आती रहती हैं। लोगों का आरोप है कि DDA का मौजूदा मैकेनिज्म उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेता।

हेडक्वार्टर के चक्कर लगाने को थे मजबूर

स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने के कारण लोगों को अपनी समस्याएं लेकर DDA मुख्यालय तक जाना पड़ता था। इससे न सिर्फ समय बर्बाद होता था, बल्कि कई बार शिकायतें लंबित भी रह जाती थीं। हालांकि DDA ने हर RWA के साथ एक लिंक ऑफिसर नियुक्त किया हुआ है, लेकिन इसके बावजूद समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा था।

1967 से हाउसिंग गतिविधियां चला रहा DDA

DDA ने साल 1967 में अपनी हाउसिंग गतिविधियों की शुरुआत की थी। अब तक यह 50 से अधिक हाउसिंग स्कीम लॉन्च कर चुका है। साल 2022 तक DDA से जुड़ी 240 से ज्यादा RWA सक्रिय हैं। इतने बड़े स्तर पर हाउसिंग होने के कारण समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए DDA ने जनसुनवाई का यह नया सिस्टम लागू करने का फैसला लिया है।

लोगों को मिलेगी राहत की उम्मीद

DDA की इस नई पहल से फ्लैट्स में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अगर यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो स्थानीय स्तर पर ही समस्याओं का समाधान संभव होगा और लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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