Puri Jagannath Temple News: पुरी श्रीमंदिर के नीलचक्र पर बुधवार सुबह एक बार फिर चील बैठी दिखाई दी। नीलचक्र में लगे अक्षयदंड के पतितपावन बाना के ऊपर चील काफी देर तक बैठी रही। इसके बाद श्रद्धालुओं और सेवायतों के बीच इस दृश्य को लेकर चर्चा तेज हो गई।
चील के बैठने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं
पतितपावन बाना के ऊपर चील के बैठने को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं सामने आ रही हैं। कुछ सेवायत इसे अशुभ संकेत मानते हैं, जबकि कुछ अन्य इसे महाप्रभु जगन्नाथ का संकेत बता रहे हैं। हालांकि, इन मान्यताओं की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।
स्थानीय मान्यताओं में पतितपावन बाना पर चील के बैठने को कभी-कभी देश में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं या अन्य विपरीत परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और चक्रवात जैसी घटनाओं के संदर्भ में ऐसी चर्चाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
श्रीमंदिर के नीलचक्र के आसपास पहले भी चील के उड़ने और बैठने, मानसी बाना के टूटने तथा बड़ी संख्या में चीलों के मंदिर के पास मंडराने के दृश्य सामने आते रहे हैं।
गहरे अवदाब के बीच बढ़ी चर्चा
वहीं, मौसम विभाग ने गहरे अवदाब के प्रभाव से भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई है। ऐसे समय में नीलचक्र पर चील के बैठने की घटना ने जगन्नाथ भक्तों और सेवायतों के बीच चर्चा को और बढ़ा दिया है।
धवला बाना को लेकर भी दावा
इससे पहले मंगलवार को पुरी श्रीमंदिर के नीलचक्र पर धवला बाना लगाए जाने को लेकर भी चर्चा हुई थी। युवा शोधकर्ता सौम्य रंजन पंडा ने दावा किया कि धवला बाना बेहद कम अवसरों पर लगाया जाता है। उन्होंने इसे आने वाली विपत्ति के संदर्भ में महाप्रभु का संकेत बताया।
उनका यह भी दावा है कि धवला बाना लगाए जाने के बाद चक्रवात कमजोर हुआ। हालांकि, धवला बाना लगाए जाने और चक्रवात के कमजोर होने के बीच किसी वैज्ञानिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
अब एक ओर धवला बाना लगाए जाने की चर्चा है, तो दूसरी ओर नीलचक्र पर चील के बैठने की घटना ने श्रद्धालुओं के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या यह महज एक प्राकृतिक घटना है या इससे कोई धार्मिक संकेत जुड़ा है? फिलहाल यह चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बीच आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।
