Stock Market Strategy: जब दुनिया भर में वॉर का शोर हो और हर तरफ अनिश्चितता बनी हो, ऐसे समय में निवेशकों के लिए शांत रहना जरूरी है। कोटक महिंद्रा AMC की शिबानी कुरियन का कहना है कि सवाल सिर्फ एक दिन या एक हफ्ते का नहीं, बल्कि एक, तीन और पांच साल के नजरिए का है। इस दौर में घबराकर पोर्टफोलियो से बाहर निकलना या शॉर्ट टर्म फैसले लेना नुकसानदेह हो सकता है। बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते हुए ग्रोथ को ट्रैक करना और अपनी कन्विक्शन बनाए रखना जरूरी है।
मिडिल ईस्ट तनाव और बाजार की वोलेटिलिटी
कुरियन का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे कॉन्फ्लिक्ट का असर बाजार में दिख रहा है। यह वोलेटिलिटी स्पष्ट रूप से जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रम का परिणाम है। अगर यह संघर्ष निकट अवधि में सुलझता है, तो बाजार दोबारा फंडामेंटल्स पर फोकस करेगा। हालांकि, अगर यह लंबा चलता है, तो करंट अकाउंट डेफिसिट, महंगाई, फिसिकल डेफिसिट और अर्निंग्स पर असर संभव है। फिर भी घरेलू फंडामेंटल फैक्टर्स मजबूत बने हुए हैं और हालिया तिमाही नतीजों में अर्निंग्स सुधार के संकेत मिले हैं।
एसआईपी और लंपसम निवेश पर सलाह
निवेश के तरीके को लेकर राय स्पष्ट है कि एसआईपी के जरिए निवेश लंबी अवधि के लिए सबसे उपयुक्त माध्यम है। एसेट एलोकेशन को अपने रिस्क प्रोफाइल और निवेश लक्ष्यों के अनुरूप बनाए रखना चाहिए। बाजार की निकट अवधि की अस्थिरता को देखते हुए निवेश रणनीति बदलने की जरूरत नहीं है। अगर लंपसम निवेश करना हो तो ऐसे फंड पर विचार किया जा सकता है जहां फंड मैनेजर एसेट एलोकेशन का निर्णय लेते हैं।
ऑटो सेक्टर में डिमांड का समर्थन
ऑटो सेक्टर पर नजरिया सकारात्मक है। हाल में आए सेल्स नंबर्स बेहतर रहे हैं। पॉलिसी इनिशिएटिव्स जैसे इनकम टैक्स कट और जीएसटी कट से डिमांड को समर्थन मिलने की उम्मीद है। रूरल इनकम में सुधार और बॉटम ऑफ द पिरामिड सेगमेंट से मांग भी सहारा दे सकती है। टू व्हीलर, कमर्शियल व्हीकल और पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में रिप्लेसमेंट डिमांड के संकेत हैं, जिससे ग्रोथ ट्रेंड बरकरार रह सकता है।
आईटी सेक्टर में एआई ट्रांसफॉर्मेशन का असर
आईटी सेक्टर में गिरावट एआई आधारित टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़ी अस्थिरता का हिस्सा है। यह एक बड़ा परिवर्तनकारी दौर है, जिसमें वर्क की प्रकृति बदल रही है। लेगसी एप्लिकेशन डेवलपमेंट से एआई संबंधित सर्विस की ओर शिफ्ट देखने को मिल सकती है। हालांकि यह मान लेना कि सॉफ्टवेयर सर्विस खत्म हो जाएंगी, अतिशयोक्ति है। जो कंपनियां तेजी से रिस्किलिंग और नए सॉल्यूशन ऑफर कर सकेंगी, वे बेहतर स्थिति में होंगी। निकट अवधि में वोलेटिलिटी संभव है, लेकिन समय के साथ डिफरेंशिएशन साफ दिखेगा।
2026 के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित सेक्टर
मौजूदा ग्लोबल अनिश्चितता में फोकस डोमेस्टिक फेसिंग सेक्टर्स पर है। बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज में क्रेडिट ग्रोथ सुधार के संकेत दे रही है और मार्जिन प्रेशर कम होता दिख रहा है। कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी, जिसमें ऑटो शामिल है, पॉलिसी सपोर्ट से लाभान्वित हो सकता है। हेल्थकेयर, खासकर हॉस्पिटल सेगमेंट, बढ़ती प्रति व्यक्ति आय और हाई क्वालिटी हेल्थकेयर की मांग से समर्थित है। इन सेक्टर्स में ग्रोथ ट्रेंड अपेक्षाकृत मजबूत नजर आ रहा है। निष्कर्ष यही है कि वैश्विक तनाव के इस दौर में निवेशकों को शॉर्ट टर्म शोर से ऊपर उठकर लंबी अवधि की रणनीति पर टिके रहना चाहिए।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
