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क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार: इजरायल-ईरान जंग के बीच $64,000 के नीचे फिसला बिटकॉइन

Iran Israel Conflict Impact on Bitcoin: ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद बिटकॉइन की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। बिटकॉइन के दाम लुढ़ककर 64,000 डॉलर से नीचे आ गए हैं। बिटकॉइन के अलावा दूसरी बड़ी क्रिप्‍टो करेंसी को भी नुकसान हुआ है।

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Bitcoin Crash

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और इजरायल-अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों ने डिजिटल करेंसी की दुनिया यानी क्रिप्टोकरेंसी मार्केट (Crypto Market) को भी हिलाकर रख दिया है। दोनों देशों के बढ़ी टेंशन के बाद निवेशकों में भारी घबराहट (Panic) देखी गई, जिसका सीधा असर दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) पर पड़ा। देखते ही देखते बिटकॉइन की कीमतें धड़ाम हो गईं और यह 64,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह गिरावट 60,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर तक जाएगी।

युद्ध का डर और क्रिप्टो मार्केट में बिकवाली (Crypto Sell-off)

आमतौर पर बिटकॉइन को 'डिजिटल गोल्ड' माना जाता है, लेकिन युद्ध जैसी अनिश्चित परिस्थितियों में यह अक्सर जोखिम भरी संपत्ति (Risk Asset) की तरह व्यवहार करता है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की खबरों के आते ही वैश्विक निवेशकों ने सुरक्षित ठिकानों की तलाश शुरू कर दी। इसके परिणामस्वरूप, क्रिप्टोकरेंसी बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला गया। बिटकॉइन, जो कुछ समय पहले तक मजबूती दिखा रहा था, इस हमले के बाद अचानक बिकवाली के दबाव में आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक क्रिप्टो बाजार में ऐसी ही अस्थिरता बनी रहेगी।

$64,000 का स्तर टूटा, अब $60,000 पर नजर

बिटकॉइन के लिए 64,000 डॉलर का स्तर एक मजबूत सपोर्ट माना जा रहा था, लेकिन युद्ध की खबरों ने इस दीवार को गिरा दिया। बाजार के विश्लेषकों (Analysts) के अनुसार, यदि गिरावट का यह सिलसिला जारी रहा, तो बिटकॉइन जल्द ही 60,000 डॉलर के स्तर को छू सकता है। यदि यह स्तर भी टूट जाता है, तो क्रिप्टो मार्केट में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। बिटकॉइन के गिरने का असर अन्य छोटी मुद्राओं (Altcoins) जैसे एथेरियम, सोलाना और डॉजकॉइन पर भी पड़ा है, जो भारी नुकसान के साथ ट्रेड कर रहे हैं।

निवेशक क्यों रहे हैं घबरा? (Why Investors are Panic-selling)

युद्ध की स्थिति में निवेशक 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) मोड में आ जाते हैं। इसका मतलब है कि वे उन संपत्तियों से पैसा निकालते हैं जिनमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है और उस पैसे को सोने (Gold) या सरकारी बॉन्ड में निवेश करते हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन बाधित होने और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में लिक्विडिटी यानी नकदी की कमी के डर से भी निवेशकों ने अपनी क्रिप्टो होल्डिंग्स बेचना शुरू कर दिया है।

आगे क्या होगा?

क्रिप्टो बाजार की रिकवरी पूरी तरह से इजरायल-ईरान के बीच आने वाली खबरों पर निर्भर करेगी। यदि तनाव कम होता है और शांति की ओर कदम बढ़ते हैं, तो बिटकॉइन में एक बार फिर 'बाउंस बैक' (Bounce Back) देखने को मिल सकता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए जानकारों की सलाह है कि नए निवेशकों को अभी सावधानी बरतनी चाहिए और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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