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क्रूड में फिर लगी आग, दो दिन आराम के बाद 12% उछले दाम, एशियाई बाजार हुए धड़ाम

अमेरिका-ईरान की जंग के चलते क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। हालांकि, बुधवार को ट्रंप की तरफ से युद्ध खत्म करने के संकेतों के बाद दाम में नरमी आई। लेकिन, शुक्रवार को फिर से क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है।

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ट्रप ने फिर बदला अपना बयान

Crude Oil Price Today: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड ऑयल में फिर उबाल आ गया है। दो दिन की राहत के बाद कीमतें 12% तक उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गईं। महंगे तेल के दबाव में एशियाई बाजारों में बिकवाली तेज हुई है, जिससे ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

क्रूड 110 डॉलर के पार

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी लौट आई है। Brent Crude करीब 109 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जबकि WTI Crude Oil 112 डॉलर के पार ट्रेड कर रहा है। दो दिन पहले अमेरिकी संकेतों के चलते कीमतों में नरमी आई थी, लेकिन जंग के खतरे के फिर बढ़ने से सप्लाई को लेकर चिंता गहरा गई है।

सप्लाई पर बढ़ा खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ऑयल सप्लाई को लेकर बड़ा जोखिम खड़ा कर दिया है। मिडिल ईस्ट से होने वाली सप्लाई में किसी भी बाधा का सीधा असर ग्लोबल कीमतों पर पड़ता है। मार्केट को डर है कि अगर हालात और बिगड़े, तो तेल की कीमतें 120 डॉलर के पार भी जा सकती हैं, जिससे एनर्जी क्राइसिस गहरा सकता है।

एशियाई बाजारों में गिरावट

महंगे क्रूड का असर सीधे शेयर बाजारों पर दिखा। एशियाई बाजारों में कमजोरी रही, जहां कई प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। Hang Seng और Shanghai Composite में गिरावट दर्ज की गई, जबकि इंडोनेशिया का Jakarta Composite 2% से ज्यादा टूट गया। हालांकि जापान का Nikkei कुछ मजबूती दिखाता नजर आया, लेकिन कुल मिलाकर सेंटीमेंट कमजोर रहा।

महंगाई का खतरा बढ़ा

तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आता है। इससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें ऊंची रखने का दबाव बन सकता है, जो इक्विटी मार्केट के लिए निगेटिव संकेत है।

आगे क्या संकेत?

फिलहाल बाजार पूरी तरह जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम पर निर्भर है। अगर तनाव कम होता है, तो कीमतों में राहत आ सकती है, लेकिन हालात बिगड़ने पर क्रूड और उछाल दिखा सकता है। ग्लोबल मार्केट के लिए यह एक हाई रिस्क फेज है, जहां हर अपडेट कीमतों और बाजार की दिशा तय कर रहा है।

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Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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