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Brent Crude Price: ट्रंप की धमकी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, 106 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड ऑयल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान वॉर के बीच सम्बोधन में ईरान को एक बार फिर धमकी दे डाली है, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त आग लग गई। ट्रंप ने एक तरफ तो युद्ध खत्म करने के संकेत दिए, लेकिन दूसरी तरफ दूसरे देशों को होर्मुज स्ट्रेट खुद सुरक्षित करने की चुनौती भी दे डाली। इस भाषण के बाद जो कच्चा तेल $100 के नीचे गिर रहा था, वह अचानक उछलकर $105 के पार पहुंच गया।

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Crude Oil

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया संबोधन ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ट्रंप के बयान के खत्म होते ही ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $106 प्रति बैरल को पार कर गईं। ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिका के इस कड़े रुख ने दुनिया भर के निवेशकों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने न केवल युद्ध की चेतावनी दी है, बल्कि ऊर्जा संकट से जूझ रहे देशों को एक ऐसा सुझाव दिया है जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

कच्चे तेल की कीमतों में आग

जैसे ही ट्रंप का संबोधन समाप्त हुआ, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत तेजी से बढ़कर $105-$106 के करीब पहुँच गई। डब्लूटीआई (WTI) क्रूड में भी इसी तरह की तेजी देखी जा रही है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने न केवल तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स को भी महंगा कर दिया है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करते हैं, यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है। यदि कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं या $110 के पार निकल गईं, तो आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संशोधन (Hike) की संभावना बढ़ सकती है, जिससे महंगाई दर में इजाफा होना तय है।

क्या 150 डॉलर पार होंगी कच्चे तेल की कीमतें

ईरान-इजराइल युद्ध के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 28 फरवरी से अब तक 50% उछलकर $107 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। होर्मुज स्ट्रेट में तेल सप्लाई बाधित होने से बाजार में भारी अनिश्चितता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। हालांकि दोनों देश संघर्ष खत्म करने का रास्ता ढूंढ रहे हैं, लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव का सिलसिला थम नहीं रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि डेरिवेटिव्स मार्केट में ट्रेडर्स अब अप्रैल के आखिर तक तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल पहुंचने की शर्त लगा रहे हैं। ऑप्शंस ट्रेड डेटा के अनुसार, $150 की कीमत पर 'कॉल ऑप्शंस' खरीदने की होड़ पिछले एक महीने में दस गुना बढ़ गई है। यदि ऐसा हुआ, तो यह 2008 के $147 प्रति बैरल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा। फिलहाल ट्रेडर्स निकट भविष्य में आने वाले बड़े उछाल के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।

क्या कह रहा है बीता ट्रेंड?

होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने से दुनिया का लगभग 20% क्रूड ऑयल खाड़ी देशों में फंस गया है, जिससे अप्रैल अंत तक ब्रेंट क्रूड के $150 प्रति बैरल तक पहुंचने की प्रबल आशंका है। बाजार में निवेशकों का डर इस कदर हावी है कि 'कॉल ऑप्शंस' में ओपन इंटरेस्ट 10 गुना बढ़कर 28,941 लॉट्स हो गया है, वहीं कुछ ट्रेडर्स तो जून के लिए $300 तक के दांव लगा रहे हैं। अगर कीमतें $150 के स्तर को छूती हैं, तो यह 2008 के $147.50 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा। ब्लैकरॉक के CEO लैरी फिंक ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक इस उच्च स्तर पर बनी रहीं, तो दुनिया को भीषण वैश्विक मंदी का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप की 'स्टोन एज' वाली चेतावनी और होर्मुज स्ट्रेट का विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक टीवी संबोधन के दौरान ईरान पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान पर "बहुत कड़ा हमला" करने की तैयारी में है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अमेरिका की सैन्य शक्ति ईरान को वापस "स्टोन एज" (पाषाण युग) में पहुंचा देगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान पहले से ही आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध की मार झेल रहा है। इसके अलावा, ट्रंप ने उन देशों को आड़े हाथों लिया जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में शामिल नहीं हो रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन देशों को ईंधन की कमी महसूस हो रही है, वे या तो अमेरिका से तेल खरीदें या फिर खुद हिम्मत जुटाकर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर कब्जा कर लें। ट्रंप का मानना है कि ईरान अब पूरी तरह तबाह हो चुका है और उसकी घेराबंदी करना अब आसान है।

अमेरिका में बढ़ रही महंगाई

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में स्वीकार किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से गैस (पेट्रोल) की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है, जिससे आम अमेरिकी नागरिक आर्थिक बोझ महसूस कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इसे एक 'अस्थायी' संकट करार दिया है। ट्रंप ने कहा कि कई अमेरिकी नागरिक पेट्रोल की कीमतों में हुई इस हालिया बढ़ोतरी को लेकर फिक्रमंद हैं, लेकिन सरकार स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कड़े कदम उठा रही है। उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि ईरान पर कड़ा प्रहार करना ही भविष्य में तेल की कीमतों को स्थिर करने का एकमात्र रास्ता है, क्योंकि ईरान वैश्विक तेल सप्लाई में एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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