मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और इजराइल-अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट में खलबली मचा दी है। 9 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $119 प्रति बैरल के स्तर को छू गई हैं, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है। भारत के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है क्योंकि हम अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करते हैं। ग्लोबल बाजार में होने वाली इस हलचल ने न केवल आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि देश की बड़ी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे IOCL, BPCL और HPCL की वित्तीय सेहत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे कमाई करती हैं कंपनियां?
आमतौर पर ये तेल कंपनियां दो मोर्चों पर काम कर मुनाफा कमाती हैं पहला रिफाइनिंग और दूसरा मार्केटिंग। जब कच्चा तेल सस्ता होता है और पेट्रोल पंपों पर कीमतें स्थिर रहती हैं, तब ये कंपनियां ₹8 से ₹12 प्रति लीटर तक का शानदार मार्केटिंग मार्जिन या मुनाफा कमाती हैं। लेकिन मार्च 2026 के ताजा हालात ने इस पूरे गणित को उल्टा कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस जबरदस्त तेजी के कारण कंपनियों का मुनाफा अब ₹20 प्रति लीटर के भारी घाटे में बदल गया है। सरल शब्दों में कहें तो, मौजूदा $119 के भाव पर पेट्रोल और डीजल की हर लीटर बिक्री पर कंपनियां अपनी जेब से नुकसान उठा रही हैं।
कच्चे तेल का $100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बने रहना भारतीय तेल कंपनियों के लिए 'खतरे की घंटी' है। नोमुरा और यूबीएस (UBS) जैसी दिग्गज रेटिंग एजेंसियों ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि अगर कच्चा तेल इसी ऊंचे स्तर पर टिका रहता है, तो कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। हालांकि, राहत की बात यह है कि साल 2024 और 2025 के शुरुआती दौर में जब तेल की कीमतें कम थीं, तब इन कंपनियों ने करीब ₹81,000 करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया था। यह 'कैश बफर' फिलहाल एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जिससे कंपनियां इस तात्कालिक झटके को झेलने में सक्षम हैं।
क्या महंगा होगा पेट्रोल डीजल?
जहां तक आम जनता की जेब का सवाल है, सरकारी सूत्रों के अनुसार फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य महंगाई (Inflation) को काबू में रखना है, क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि कच्चे तेल में हर 10% की वृद्धि भारत की खुदरा महंगाई को 0.40% से 0.80% तक बढ़ा सकती है। हालांकि, ईंधन की कीमतों में स्थिरता के बीच 7 मार्च 2026 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में ₹60 की बढ़ोतरी की जा चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव अब धीरे-धीरे घरेलू मोर्चे पर भी दिखने लगा है।
वर्तमान स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक 'ट्रिपल अटैक' की तरह है। पहली मार रुपये पर पड़ी है, जहां तेल आयात के लिए डॉलर की बढ़ती मांग ने इसे 92.52 के सर्वकालिक निचले स्तर पर धकेल दिया है। दूसरी मार देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर है, जिसके बढ़ने से यह जीडीपी के 1.8% तक पहुंचने का अनुमान है। और अंत में, शेयर बाजार में भी इसका असर साफ दिख रहा है; 9 मार्च को सेंसेक्स और निफ्टी में आई भारी गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान IOC, BPCL और HPCL जैसी तेल कंपनियों के निवेशकों को उठाना पड़ा है। अगर ईरान-इजरायल युद्ध का तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिन भारतीय बाजार और उपभोक्ताओं के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
