देश में इस साल जून में भीषण गर्मी और मानसून में देरी के कारण बिजली की खपत में काफी बढ़ोतरी हुई है। जून में बिजली की कुल खपत 11.62 प्रतिशत बढ़कर 166.46 अरब यूनिट पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 149.13 अरब यूनिट थी। गर्मी ज्यादा होने और बारिश देर से आने की वजह से लोगों ने कूलर, पंखे और खासकर एयर कंडीशनर जैसे ठंडक देने वाले उपकरणों का अधिक इस्तेमाल किया, जिससे बिजली की मांग और खपत दोनों बढ़ गई। यह जानकारी आधिकारिक आंकड़ों से सामने आई है।
पिछले महीने बिजली की अधिकतम मांग भी बढ़कर 264.76 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) हो गई, जो जून, 2025 में 242.77 गीगावाट थी। दक्षिण-पश्चिम मानसून चार जून, 2026 को केरल पहुंचा था। आम तौर पर, मानसून एक जून के आसपास केरल पहुंचता है। यह दक्षिण-पश्चिम मानसून आने (जून-सितंबर) का शुरुआत का संकेत होता है।
इस वजह से बढ़ी बिजली की खपत
विशेषज्ञों का कहना है कि जून में मानसून की धीमी गति के कारण लू की स्थिति बनी। इससे एयर कंडीशनर और डेजर्ट कूलर जैसे ’कूलिंग’ उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा। इससे बिजली की मांग और खपत बढ़ी है। उनका मानना है कि जुलाई में बिजली की मांग स्थिर रहेगी, क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बारिश में थोड़ी कमी का अनुमान लगाया है।
बिजली की अधिकतम मांग मई, 2026 में बढ़कर 270.82 गीगावट के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि 2025 में इसी महीने में यह 230.99 गीगावाट रही थी। इस साल मई में लगातार चार दिन तक बिजली की अधिकतम मांग रिकॉर्ड स्तर पर रही। 18 मई को यह 257.37 गीगावाट, 19 मई को 260.45 गीगावाट, 20 मई को 265.44 गीगावाट और 21 मई को 270.82 गीगावाट रही थी।
बिजली मंत्रालय के अनुसार, इस साल गर्मियों में देश में बिजली की मांग बढ़कर लगभग 270 गीगावाट तक पहुंच सकती है। पिछले साल जून में गर्मियों के दौरान बिजली की अधिकतम मांग 242.77 गीगावाट दर्ज की गई थी। हालांकि, यह मांग सरकार के पहले के अनुमान 277 गीगावाट से कम रही थी।
(इनपुट-भाषा)
