बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी अब सिर्फ महिलाओं तक सीमित न रहे और मातृत्व की वजह से महिलाओं के करियर पर असर न पड़े, इसके लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने केंद्र सरकार को कई बड़े बदलावों की सिफारिश की है। आयोग ने मातृत्व और चाइल्ड केयर से जुड़े कानूनों में 37 सिफारिशें दी हैं। इनमें सबसे अहम प्रस्ताव 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव को माता-पिता के बीच बांटने, निजी क्षेत्र में भी चाइल्ड केयर लीव लागू करने और पेड पितृत्व अवकाश अनिवार्य करने का है।
आयोग ने अपनी सिफारिशें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजी हैं। ये सिफारिशें 5 मई 2026 को नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय सलाह-मशविरा बैठक में हुई चर्चा के आधार पर तैयार की गई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इन सिफारिशों में क्या-क्या है...
730 दिन की CCL में मां-पिता दोनों की हिस्सेदारी
NCW ने मौजूदा 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव व्यवस्था को जेंडर न्यूट्रल बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत दोनों कामकाजी माता-पिता को 365-365 दिन की छुट्टी देने की सिफारिश की गई है। अगर दोनों एक ही संस्थान में काम करते हैं तो 730 दिन की एक साझा छुट्टी का विकल्प भी रखा जा सकता है। वहीं, 0 से 2 साल के बच्चे के लिए प्राथमिक और दूसरे देखभालकर्ता के बीच 60:40 के अनुपात में साझा देखभाल का मॉडल सुझाया गया है।प्राइवेट सेक्टर में भी CCL
आयोग ने चाइल्ड केयर लीव का दायरा सरकारी कर्मचारियों तक सीमित न रखने की सिफारिश की है। इसे चरणबद्ध तरीके से निजी क्षेत्र में लागू करने का प्रस्ताव है। पहले बड़ी कंपनियों और उद्योगों को शामिल किया जाए और बाद में मध्यम और छोटे कारोबारों तक इसका विस्तार किया जाए। इसके लिए सोशल सिक्योरिटी कोड में जरूरी प्रावधान जोड़ने और चाइल्ड केयर सुविधाएं देने वाले नियोक्ताओं को टैक्स इंसेंटिव व आर्थिक सहायता देने की भी सिफारिश की गई है।
हर सेक्टर में पेड पितृत्व अवकाश
NCW ने निजी और असंगठित क्षेत्र में अनिवार्य पेड पितृत्व अवकाश लागू करने की सिफारिश की है। आयोग का प्रस्ताव है कि पिता को भी बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी का कानूनी अधिकार मिले। इसके साथ भविष्य में साझा पैरेंटल लीव की ऐसी व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है, जिसमें मां और पिता दोनों बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी निभा सकें।
2030 तक 5 लाख क्रेच सीटों का लक्ष्य
बच्चों की देखभाल के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए NCW ने 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें तैयार करने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए ‘नेशनल चाइल्डकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन’ बनाने की सिफारिश की गई है। कंपनियों को ऑन-साइट क्रेच, साझा या क्लस्टर क्रेच और राज्य के चाइल्डकेयर फंड में योगदान जैसे विकल्प दिए जा सकते हैं।
नर्सिंग ब्रेक 15 से बढ़ाकर 30 मिनट करने की सिफारिश
कामकाजी माताओं के लिए नर्सिंग ब्रेक की अवधि 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा संस्थानों में अलग से लैक्टेशन रूम बनाने और इन प्रावधानों को लागू कराने के लिए सख्त निगरानी की सिफारिश की गई है।
गोद लेने वाली और सरोगेसी से मां बनने वाली महिलाओं को भी समान लाभ
NCW ने जैविक मां, गोद लेने वाली मां और कमीशनिंग मां के बीच मातृत्व लाभ में समानता की सिफारिश की है। गोद लेने और कमीशनिंग मदर्स के लिए छुट्टी को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने का प्रस्ताव है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुरूप सोशल सिक्योरिटी कोड में बदलाव की जरूरत भी बताई है।
तीसरे बच्चे को भी CCL देने पर विचार
आयोग ने मौजूदा दो बच्चों तक सीमित चाइल्ड केयर लीव व्यवस्था की समीक्षा करने की सिफारिश की है। इसके तहत तीसरे बच्चे को भी CCL के दायरे में लाने के लिए चरणबद्ध व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही अलग-अलग राज्यों में CCL और मातृत्व लाभ के नियमों में ज्यादा समानता लाने की बात कही गई है।
गिग और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को भी मातृत्व सुरक्षा
NCW ने मातृत्व लाभ को औपचारिक नौकरी तक सीमित न रखने पर जोर दिया है। आयोग ने गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को भी मातृत्व और चाइल्ड केयर लाभ देने की सिफारिश की है। इसके लिए सोशल सिक्योरिटी कोड की धारा 109 को लागू करने और मातृत्व एवं चाइल्डकेयर फंड बनाने का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को भी सार्वभौमिक और कानूनी अधिकार बनाने की सिफारिश की गई है।
मां बनने की वजह से करियर पर न पड़े असर
आयोग ने भर्ती, प्रमोशन, वेतन और पेंशन में मातृत्व या चाइल्ड केयर लीव के कारण महिलाओं के साथ भेदभाव रोकने के उपाय सुझाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी लेने वाली महिला को कम प्रतिबद्ध कर्मचारी मानने की सोच बदलनी होगी। आयोग ने साफ तौर पर मातृत्व को महिला के करियर के लिए नुकसान का कारण न बनने देने पर जोर दिया है।
कानून तोड़ने वाले नियोक्ताओं पर सख्ती
NCW ने नियमों का पालन नहीं करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ शिकायत व्यवस्था मजबूत करने और सख्त दंड का प्रस्ताव दिया है। महिलाओं को उनके मातृत्व और चाइल्ड केयर अधिकारों की जानकारी देने के लिए ग्रामीण और शहरी इलाकों में लीगल एड अवेयरनेस कैंप लगाने की भी सिफारिश की गई है।
NCW की 37 सिफारिशों का फोकस
आयोग की 37 सिफारिशें मातृत्व लाभ, चाइल्ड केयर लीव, पितृत्व अवकाश, क्रेच, नर्सिंग और लैक्टेशन सुविधा, निजी क्षेत्र में कवरेज, कानूनों में बदलाव, शिकायत निवारण और कार्यस्थल पर भेदभाव रोकने जैसे नौ प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी हैं। इसका व्यापक उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें बच्चे की जिम्मेदारी माता-पिता दोनों की हो और महिलाओं को परिवार और करियर में से किसी एक को चुनने की मजबूरी न रहे।