भारतीय टीम से बाहर चल रहे लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने पिछले महीने लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित मैदान पर नॉर्थम्पटनशर की ओर से मिडलसेक्स के खिलाफ अपना आखिरी इंग्लिश काउंटी चैम्पियनशिप मैच खेलने के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। भारत के लिए 72 वनडे और 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके चहल लाल गेंद की क्रिकेट में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए। उन्होंने 49 प्रथम श्रेणी मैच खेले जिनमें छह बार पांच या इससे अधिक विकेट लेने के कारनामे सहित 148 विकेट लिए। नॉर्थम्पटनशर की तरफ से अपने अंतिम प्रथम श्रेणी सत्र में चहल ने पांच मैचों में 21 विकेट लिए, जिसमें डरहम के खिलाफ एक मैच में नौ विकेट लेना भी शामिल है।
चहल ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, ’’मैंने अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच लॉर्ड्स में खेला था। यह कहते हुए मैं भावुक हो रहा हूं क्योंकि टेस्ट क्रिकेट खेलना मेरा सपना था। एक ऐसा सपना जिसे मैंने कई साल तक संजोकर रखा। भले ही यह सपना पूरा न हुआ हो, लेकिन मैं अपने अब तक के सफर से पूरी तरह संतुष्ट हूं।’’
उन्होंने कहा, ’’मेरे लिए लाल गेंद का क्रिकेट केवल एक अन्य प्रारूप नहीं था। यहीं मैंने धैर्य, जज्बा, दृढ़ता और घंटों तक मैदान पर रहकर हर रन और हर विकेट के लिए संघर्ष करने के आनंद का मतलब सीखा।’’
चहल कभी भी भारतीय टेस्ट टीम में जगह नहीं बना पाए, हालांकि एक बार उन्हें दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ खेलने के लिए भारत ए टीम में चुना गया था। उस समय तत्कालीन कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली को कलाई के स्पिनर की सख्त जरूरत थी।
