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2025-26 में घटी निर्माण उपकरण की बिक्री, निर्यात में हुई बढ़ोतरी: आईसीईएमए

उद्योग संगठन के अनुसार, 2025-26 में घरेलू बिक्री करीब सात प्रतिशत घटकर 1,13,229 इकाई रह गई, जो 2024-25 में 1,21,301 इकाई थी। यह विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के धीमे क्रियान्वयन और सतर्क खरीद रुख को दर्शाता है।

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2025-26 में बुनियादी ढांचा उपकरणों की घरेलू मांग कई चुनौतियों से प्रभावित रही। (फोटो क्रेडिट-iStock)

भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग की कुल बिक्री वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 2 प्रतिशत घटकर 1,36,995 यूनिट रह गई। यह जानकारी शुक्रवार को भारतीय निर्माण उपकरण विनिर्माता संघ (आईसीईएमए) ने दी। इससे पहले 2024-25 में उद्योग की बिक्री 1,40,191 यूनिट थी। आईसीईएमए के मुताबिक, घरेलू बाजार में कुछ समय के लिए आई मुश्किलें, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और प्रोजेक्ट्स में देरी की वजह से बिक्री पर असर पड़ा। हालांकि, निर्यात में 32 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी हुई, जिससे उद्योग को सहारा मिला।

भारतीय निर्माण उपकरण विनिर्माता संघ (आईसीईएमए) के अध्यक्ष दीपक शेट्टी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में दर्ज गिरावट को उद्योग की संरचनात्मक कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण जमीन पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन में धीमापन रहा।

शेट्टी ने कहा, "सरकार का पूंजीगत व्यय आवंटन अब भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, लेकिन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, भूमि अधिग्रहण से जुड़ी चुनौतियों और भुगतान चक्र धीमा रहने से वर्ष के दौरान उपकरणों की मांग प्रभावित हुई।" उन्होंने कहा कि निर्यात में मजबूत वृद्धि से उद्योग ने अपनी मजबूती दिखाई है। इससे भारतीय निर्माण उपकरणों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ने का भी संकेत मिलता है। उन्होंने कहा, "देश में बुनियादी ढांचा विकास पर लगातार ध्यान दिए जाने से हमें उद्योग की दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाओं पर भरोसा है।"

उद्योग संगठन के अनुसार, 2025-26 में घरेलू बिक्री करीब सात प्रतिशत घटकर 1,13,229 इकाई रह गई, जो 2024-25 में 1,21,301 इकाई थी। यह विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के धीमे क्रियान्वयन और सतर्क खरीद रुख को दर्शाता है।

भारत दुनिया का तीसरा बड़ा बाजार

भारत अभी भी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्माण उपकरण बाजार बना हुआ है। अनुमान है कि यह क्षेत्र सालाना 8.3 प्रतिशत की संचयी वृद्धि दर के साथ 2030 तक 14.76 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। आईसीईएमए के अनुसार मिट्टी खोदने और हटाने वाले उपकरणों का बाजार में दबदबा बना रहा। इसकी बिक्री 97,236 इकाई रही, जो कुल बाजार का करीब 71 प्रतिशत हिस्सा है। हालांकि, इसमें सालाना आधार पर दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इसके मुताबिक सामग्री उठाने और ढोने वाले उपकरणों की बिक्री 10 प्रतिशत घटकर 15,290 इकाई रही। वहीं, कंक्रीट उपकरणों की बिक्री 0.09 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ 14,486 इकाई रही। सड़क निर्माण उपकरणों की बिक्री 6.3 प्रतिशत बढ़कर 7,445 इकाई हो गई, जबकि सामग्री प्रसंस्करण उपकरणों की बिक्री 1.2 प्रतिशत बढ़कर 2,538 इकाई रही।

धन वितरण की रफ्तार रही धीमी

उद्योग संगठन ने कहा कि 2025-26 में बुनियादी ढांचा उपकरणों की घरेलू मांग कई चुनौतियों से प्रभावित रही। भूमि अधिग्रहण में देरी और कम परियोजना आवंटन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण सात साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। संगठन के अनुसार, ’जल जीवन मिशन’ के तहत भी धन वितरण की रफ्तार धीमी रही। वहीं, ठेकेदारों को भुगतान में देरी से पूरे क्षेत्र में नकदी की स्थिति प्रभावित हुई। आईसीईएमए के उपाध्यक्ष शलभ चतुर्वेदी ने कहा, "भारत में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की वृद्धि अब भी मजबूत है। परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन, जमीन पर तेजी से काम और ठेकेदारों के लिए बेहतर नकदी क्षेत्र में वृद्धि की रफ्तार बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।"

(इनपुट: भाषा)

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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