बिजनेस

CONCOR Disinvestment:कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का नहीं होगा निजीकरण, सरकार ने टाला प्लान

CONCOR Disinvestment: सरकार के पास वर्तमान में कॉनकॉर की 54.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। और सरकार ने कॉनकॉर में प्रबंधन नियंत्रण के साथ ही 30.8 प्रतिशत हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दी थी। कॉनकॉर की बिक्री के लिए मंत्रिमंडल ने 2019 में मंजूरी दी थी।

Image

कॉनकार पर सरकार का बड़ा फैसला

CONCOR Disinvestment:सरकार ने कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (कॉनकॉर) के निजीकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कॉनकॉर में प्रबंधन नियंत्रण के साथ ही 30.8 प्रतिशत हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दी थी। कॉनकॉर रेलवे मंत्रालय के तहत एक नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) है।सरकार के पास वर्तमान में कॉनकॉर की 54.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कॉनकॉर की बिक्री के लिए मंत्रिमंडल ने 2019 में मंजूरी दी थी।

क्यों टाला प्लान

एक अधिकारी के अनुसार सरकार द्वारा कॉनकॉर की रणनीतिक बिक्री को आगे बढ़ाने की संभावना नहीं है। रेलवे मंत्रालय और निवेशकों की ओर से कुछ चिंताएं हैं।अधिकारी ने आगे कहा कि कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 54.80 प्रतिशत होने के कारण, कॉनकॉर में बिक्री पेशकश (ओएफएस) लाने की बहुत कम गुंजाइश है।कॉनकॉर की बिक्री के लिए मंत्रिमंडल ने 2019 में मंजूरी दी थी, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है और रणनीतिक बिक्री के लिए रुचि पत्र (ईओआई) भी आमंत्रित नहीं किए गए हैं।

सरकार ने बदली विनिवेश रणनीति

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने पूंजी प्राप्तियों से 50,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है, जो पिछले वित्त वर्ष में 30,000 करोड़ रुपये था। सार्वजनिक क्षेत्र की 77 सूचीबद्ध इकाइयों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले तीन वर्षों में चार गुना बढ़कर लगभग 73 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इनमें बैंक, बीमा कंपनियां और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (सीपीएसई) शामिल हैं। इस बीच सरकार ने यह भी फैसला किया है कि सिर्फ अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए विनिवेश पर जोर देने के बजाय केंद्रीय सार्वजनिक उद्यमों (सीपीएसई) का प्रदर्शन बेहतर करने पर ध्यान देगी ताकि संपत्ति के सृजन को अधिकतम किया जा सके।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article