बिजनेस

China Economy: सुस्ती के मोड में चीन की इकोनॉमी, निर्यात ग्रोथ में आई कमी, अमेरिका-यूरोप की सख्ती का असर

China Economy: अमेरिका और यूरोप ने हाल ही में चीन के इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य उत्पादों के निर्यात पर शुल्क दरें बढ़ा दी हैं। इससे चीन के लिए विकास का इंजन माना जाने वाला व्यापार की स्थिति बिगड़ी है। आयात में कमजोर वृद्धि धीमी मांग को बताती है। इसका एक कारण रियल एस्टेट क्षेत्र में लंबे समय तक नरमी का होना है।

Image

चीन

Photo : iStock

China Economy:वैश्विक मांग कमजोर होने के कारण चीन के निर्यात में सितंबर में सुस्ती आई है। इससे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ी है। चीनी सीमा शुल्क कार्यालय के अनुसार पिछले महीने निर्यात सालाना आधार पर डॉलर के संदर्भ में 2.4 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि अगस्त में इसमें सालाना आधार पर 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। सितंबर में आयात केवल 0.3 प्रतिशत बढ़ा।अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि निर्यात में लगभग छह प्रतिशत और आयात में लगभग 0.9 प्रतिशत की वृद्धि होगी।चीन का व्यापार घाटा सितंबर में 81.7 अरब डॉलर रहा। यह अगस्त के 91 अरब डॉलर के आंकड़े से कम है।चीन सरकार कोविड-19 महामारी समाप्त होने के बाद से अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए जूझ रही है।

अमेरिका और यूरोप ने की सख्ती

अमेरिका और यूरोप ने हाल ही में चीन के इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य उत्पादों के निर्यात पर शुल्क दरें बढ़ा दी हैं। इससे चीन के लिए विकास का इंजन माना जाने वाला व्यापार की स्थिति बिगड़ी है। आयात में कमजोर वृद्धि धीमी मांग को बताती है। इसका एक कारण रियल एस्टेट क्षेत्र में लंबे समय तक नरमी का होना है।सोमवार को जारी अन्य आंकड़ों में मुद्रास्फीति में कमी और विनिर्माताओं के लिए थोक कीमतों में गिरावट देखी गई।चीन के नीति-निर्माताओं ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इसमें खर्च और निर्माण परियोजनाओं के लिए अगले साल के बजट से 200 अरब युआन (28.2 अरब डॉलर) का प्रावधान शामिल हैं।वित्त मंत्री लैन फान ने सप्ताहांत कहा कि सरकार तेज आर्थिक वृद्धि के लिए और भी कदमों पर विचार कर रही है।

अभी और कदम उठाने की जरूरत

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि लैन और अन्य अधिकारियों ने अभी तक उस पैमाने पर प्रोत्साहन नहीं दिया है जो अर्थव्यवस्था को सुस्ती से बाहर निकालने के लिए आवश्यक है।आईएनजी इकनॉमिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सितंबर तक चीन के निर्यात में सालाना आधार पर 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका प्रमुख कारण वाहन निर्यात में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। लेकिन कुल मिलाकर निर्यात धीमा हो रहा है।रिपोर्ट में इस साल सरकार के लगभग पांच प्रतिशत सालाना आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा गया है कि जब विकास का यह इंजन रुक रहा है, ऐसे में आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश और उपभोग जैसे अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों को बढ़ाने की जरूरत होगी।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article