भारत और अमेरिका के बीच हुआ नया व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के बीच यह करार ऐसे समय पर हुआ है, जब वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद व्यापार साझेदारों की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। जानकारों के मुताबिक इस समझौते से भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूमिका और मजबूत होगी।
भारत-अमेरिका के बीच व्यापार बढ़ेगा
बीजेपी सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि इस समझौते से भारत-अमेरिका के बीच व्यापार बढ़ेगा और देश में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। खास तौर पर एमएसएमई, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इस करार से इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, फार्मा, कपड़ा उद्योग, रत्न एवं आभूषण, कृषि उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं जैसे कई अहम क्षेत्रों में कामकाज आसान होगा। व्यापार से जुड़ी अड़चनें कम होने और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों को राहत मिलने की संभावना है।
सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर
इसके साथ ही टेक्नोलॉजी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। कुल मिलाकर, यह व्यापार समझौता सिर्फ एक कारोबारी करार नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच लंबी अवधि की आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने वाला कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में रफ्तार मिलेगी और देश को वैश्विक व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद मिलेगी।
