इस साल के शुरुआती 5 महीनों में ही FII ने 2 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की है। भारतीय शेयर बाजार मार्केट कैप के लिहाज से दुनिया के टॉप 5 बजारों से बाहर हो गया है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के बाजार भी मार्केट कैप के लिहाज से भारत से आगे निकल गए हैं। फिलहाल, भारतीय बाजार एशिया में सबसे खराब परफॉर्म करने वाले बाजारों में शामिल है। इन हालात को देखते हुए सरकार विदेशी निवेशकों को रिझाने की तैयारी कर रही है। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को हुई बैठक में विदेशी निवेशकों को टैक्स में ढील देने के लिए एक अध्यादेश का समर्थन किया है।
रुपये पर दबाव के बीच सरकार का बड़ा कदम
विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कुछ श्रेणियों की प्रतिभूतियों (Securities) में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों (FII/PFI) के लिए टैक्स नियमों को आसान बनाने संबंधी अध्यादेश (Ordinance) का समर्थन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल वित्त मंत्रालय के इस प्रस्ताव का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, इसे विदेशी निवेशकों को रिझाने के साथ ही रुपये को मजबूती देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इस साल 6% टूटा रुपया
जनवरी से मई तक इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है। इसके अलावा क्रूड और गोल्ड जैसी कमोडिटी के दाम बढ़ने की वजह से भी रुपये में लगातार गिरावट हो रही है। डॉलर के मुकाबले इस साल रुपया अब तक 6 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। रुपये की कमजोरी सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए चिंता बढ़ा रही है।
RBI के साथ समन्वित रणनीति
सरकार की तरफ से यह प्रस्ताव रिजर्व बैंक के नीतिगत बदलावों और कार्रवाइयों के साथ जुड़ा हुआ माना जा रहा है। 3 से 5 जून के बीच RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक हो रही है। जल्द ही इसके फैसले सामने आने हैं। माना जा रहा है रिजर्व बैंक की तरफ से भी कुछ ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे विदेशी निवेश भारत में आए और रुपये को मजबूती मिले।
FII ने उठाई थीं टैक्स सुधार की मांगें
इस साल फरवरी में आए केंद्रीय बजट से ठीक पहले विदेशी निवेशकों के प्रतिनिधियों की तरफ से सरकार के सामने कई तरह के टैक्स सुधारों की मांग रखी गई थी। इनमें खासतौर पर लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में निवेश करने पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स की समीक्षा की मांग सबसे बड़ी थी। हालांकि, सरकार ने बजट में इस मांग पर ध्यान नहीं दिया। बल्कि, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाकर बाजार में ट्रेडिंग को महंगा कर दिया, जिससे भारत में निवेश की लागत बढ़ गई।
