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सस्ता घर खरीदने से पहले जान लें ये बातें, सिर्फ कीमत देखकर लिया फैसला तो पड़ सकता है भारी

सपनों का आशियाना खरीदते समय क्या आप भी सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला ले रहे हैं? जानिए प्रॉपर्टी लोकेशन, हिडन कॉस्ट्स और मेंटेनेंस से जुड़ी वे अहम बातें, जिन्हें नजरअंदाज करना आपको भारी पड़ सकता है।

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सिर्फ कीमत देखकर लिया फैसला तो पड़ सकता है भारी

अपना घर खरीदना हर किसी के जीवन का एक बहुत बड़ा और भावुक फैसला होता है। अक्सर लोग नया घर या फ्लैट तलाशते समय सबसे ज्यादा ध्यान उसकी कीमत यानी बजट पर देते हैं। सस्ता ऑफर या आकर्षक डिस्काउंट देखते ही कई लोग बिना सोचे-समझे डील फाइनल कर लेते हैं। हालांकि, रियल एस्टेट जानकारों का मानना है कि प्रॉपर्टी की सही कीमत सिर्फ उसका टैग प्राइस नहीं होती। सिर्फ कम दाम देखकर खरीदा गया घर भविष्य में आपके बजट, समय और मानसिक शांति को बिगाड़ सकता है।

घर खरीदते समय सबसे पहले क्या देखें?

  • घर का चुनाव करते समय कीमत के बाद सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोकेशन और कनेक्टिविटी (Connectivity) होता है। अक्सर शहर से काफी दूर सस्ती दरों पर फ्लैट मिल जाते हैं, लेकिन वहां रोजमर्रा के ट्रांसपोर्ट, स्कूल, अस्पताल और दफ्तर तक पहुंचने में आपका समय और ईंधन का खर्च काफी बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा, उस इलाके में बुनियादी सुविधाएं जैसे 24 घंटे पानी की सप्लाई, सीवरेज सिस्टम, बिजली बैकअप और जलभराव (Waterlogging) की स्थिति कैसी है, इसकी जांच पड़ताल करना बेहद जरूरी है।
  • तीसरी सबसे बड़ी बात जो लोग नजरअंदाज कर देते हैं, वह है हिडन कॉस्ट्स (Hidden Costs) और मंथली मेंटेनेंस। बिल्डर द्वारा बताई गई शुरुआती कीमत में कई बार रजिस्ट्री चार्ज, स्टाम्प ड्यूटी, पार्किंग चार्ज, जीएसटी, डेवलपमेंट फीस (EDC/IDC) और क्लब मेंबरशिप शामिल नहीं होती।
  • जब ये सारे खर्च जुड़ते हैं, तो घर की कुल लागत 15 से 20 फीसदी तक बढ़ जाती है। साथ ही, सोसाइटी का भारी-भरकम मंथली मेंटेनेंस चार्ज भी हर महीने आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालता है।
  • किसी भी प्रॉपर्टी में पैसा लगाने से पहले उसकी लीगल क्लियरेंस (Legal Clearance) और बिल्डर के ट्रैक रिकॉर्ड की पूरी जांच करें। सुनिश्चित करें कि प्रोजेक्ट RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) से रजिस्टर्ड हो और जमीन से जुड़े सभी पेपर्स कानूनी रूप से क्लियर हों।
  • अगर घर सस्ता मिल रहा है लेकिन बिल्डर का इतिहास पजेशन में देरी करने का रहा है या प्रोजेक्ट विवादित है, तो ऐसे सौदे से दूर रहना ही समझदारी है। हमेशा याद रखें कि एक सही घर वही है जो बजट में होने के साथ-साथ आपके जीवन को आसान और सुरक्षित बनाए।
Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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