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पजेशन की तारीख बीतने के बाद भी नहीं मिला घर? तुरंत करें ये काम, ब्याज समेत मिलेगा रिफंड!

सपनों के घर का पज़ेशन तय समय पर न मिलना किसी भी खरीदार के लिए बड़ा झटका हो सकता है। अगर आपका बिल्डर भी पज़ेशन में देरी कर रहा है, तो घबराएं नहीं; रेरा (RERA) और उपभोक्ता अदालत के जरिए आप अपने पैसे ब्याज समेत वापस पा सकते हैं।

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Builder Delayed Possesion

अपने सपनों का घर खरीदना हर इंसान की जिंदगी का एक बड़ा फैसला होता है। इसके लिए लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा देते हैं और भारी-भरकम होम लोन भी लेते हैं। लेकिन जब बिल्डर एग्रीमेंट में तय की गई पज़ेशन की तारीख बीत जाने के बाद भी घर की चाबी नहीं सौंपता, तो खरीदार को ईएमआई (EMI) और घर का किराया दोनों एक साथ भरना पड़ता है। अगर आप भी बिल्डर की इस तानाशाही और पज़ेशन में हो रही देरी से परेशान हैं, तो आपको निराश होने की जरूरत नहीं है। देश के कानून और रेरा (RERA) नियमों के तहत घर खरीदारों को कई मजबूत कानूनी अधिकार दिए गए हैं, जिनकी मदद से आप अपना हक पा सकते हैं।

बिल्डर द्वारा देरी किए जाने पर खरीदार के पास मुख्य रूप से दो बड़े रास्ते होते हैं। पहला विकल्प यह है कि अगर आप अब उस प्रोजेक्ट में नहीं रहना चाहते, तो आप बिल्डर से अपना पूरा पैसा वापस (Refund) मांग सकते हैं। RERA (Real Estate Regulation and Development Act) के नियमों के मुताबिक, अगर बिल्डर तय समय पर पज़ेशन देने में विफल रहता है, तो खरीदार को अपने दिए गए पूरे पैसे ब्याज (Interest) के साथ वापस पाने का कानूनी अधिकार है। यह ब्याज दर आमतौर पर उस दर के बराबर होती है जो बिल्डर देरी से पेमेंट करने पर ग्राहक से वसूलता है।

दूसरा विकल्प उन खरीदारों के लिए है जो अब भी उसी प्रोजेक्ट में अपना फ्लैट पाना चाहते हैं। ऐसे मामले में आप बिल्डर से प्रोजेक्ट छोड़ने के बजाय डेली डिले पेनल्टी (Delay Compensation) की मांग कर सकते हैं। जब तक बिल्डर आपको पज़ेशन नहीं दे देता, तब तक उसे हर महीने की देरी के बदले आपको एक निश्चित ब्याज या मुआवजा देना होगा। इससे आपको अपने किराए का खर्च निकालने में काफी मदद मिल जाती है।

कानूनी कदम उठाने से पहले खरीदारों को कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी चाहिए। सबसे पहले बिल्डर को एक औपचारिक लीगल नोटिस भेजें, जिसमें एग्रीमेंट की शर्तों का हवाला देते हुए पज़ेशन या रिफंड की मांग करें। अगर बिल्डर फिर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो आप अपने राज्य की RERA अथॉरिटी (State RERA Authority) में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। RERA की अदालतें रियल एस्टेट के मामलों की तेजी से सुनवाई करती हैं और खरीदारों के हित में सख्त फैसले सुनाती हैं। इसके अलावा आप कंज्यूमर कोर्ट (Consumer Forum) का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।

ध्यान रखें कि किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए आपके पास बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट (Builder-Buyer Agreement), पेमेंट की रसीदें, आवंटन पत्र (Allotment Letter) और बिल्डर के साथ हुए सभी ईमेल व संदेशों का लिखित रिकॉर्ड होना बेहद जरूरी है। यदि किसी प्रोजेक्ट में कई सारे खरीदार एक साथ पीड़ित हैं, तो वे मिलकर एक ग्रुप एसोसिएशन भी बना सकते हैं। जब सामूहिक रूप से शिकायत दर्ज की जाती है, तो बिल्डर पर दबाव काफी बढ़ जाता है और RERA से जल्द राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। संक्षेप में कहें तो, अपनी मेहनत की कमाई को बिल्डर के पास फंसा न छोड़ें; अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करें और समय रहते सही कदम उठाएं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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