बजट 2026

Indexation: क्या होता है इंडेक्सेशन,जिसकी वजह से प्रॉपर्टी बेचना हुआ महंगा और अब वित्त मंत्रालय दे रहा सफाई

What is Indexation: जब कोई व्यक्ति अपनी पुरानी प्रॉपर्टी बेचता है तो उसकी बढ़ी हुई कीमत में महंगाई को भी शामिल किया जाता है। ऐसे में उस व्यक्ति पर कम टैक्स देनदारी बनती है। नई व्यवस्था में महंगाई के असर को बाहर कर दिया गया है। हालांकि इस सुविधा को हटाने के साथ ही टैक्स दर 20 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी की गई है।

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क्या होता है इंडेक्सेशन

What is Indexation: 23 जुलाई को बजट पेश होने के बाद, जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह इंडेक्सेशन (Indexation)है। असल में बजट में प्रॉपर्टी बेचने पर करदाताओं को मिलने वाला ‘इंडेक्सेशन’ लाभ हटा दिया गया है। यानी उनकी प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों पर टैक्स तय करते समय महंगाई का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे में प्रॉपर्टी बेचने वाले पर ज्यादा टैक्स देनदारी बन सकती है। हालांकि सरकार की सफाई है चूंकि इंडेक्सेशन लाभ हटाने के बावजूद टैक्स रेट घटाए गए हैं, उससे लोगों को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। बजट में रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एलटीसीजी को ‘इंडेक्सेशन’ लाभ सहित 20 प्रतिशत से घटाकर बिना ‘इंडेक्सेशन’ के 12.5 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि 2001 से पहली खरीदी गई प्रॉपर्टी पर इंडेक्सेशन का लाभ मिलेगा।

How Indexation Calculated (कैसे कैलकुलेट होता है इंडेक्सेशन)

महंगाई के लिए ‘इंडेक्सेशन’ चार से पांच प्रतिशत के आसपास है, जो संपत्ति को कितने समय के लिए अपने पास रखा गया उस अवधि पर निर्भर करता है। यानी जब कोई व्यक्ति अपनी पुरानी प्रॉपर्टी बेचता है तो उसकी बढ़ी हुई कीमत में महंगाई को भी शामिल किया जाता है। मतलब ये है कि अगर किसी व्यक्ति ने 10 साल पहले 20 लाख में कोई प्रॉपर्टी खरीदी है। और उसे अब वह 30 लाख में बेच रहा है। तो टैक्स की गणना 20 लाख के लाभ पर नहीं बल्कि उसमें से महंगाई के असर को घटाकर की जाती है। ऐसे में उस व्यक्ति पर कम टैक्स देनदारी बनती है। नई व्यवस्था में महंगाई के असर को बाहर कर दिया गया है। हालांकि इस सुविधा को हटाने के साथ ही टैक्स दर 20 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी की गई है। अब इसी पर इनकम टैक्स विभाग ने सफाई दी है।

आयकर विभाग बोला नहीं होगा नुकसान

आयकर विभाग ने बुधवार को कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG) की दर में कटौती से अधिकतर करदाताओं को पर्याप्त कर बचत होने की उम्मीद है।आयकर विभाग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक खाते पर लिखा,नाममात्र अचल संपत्ति रिटर्न आम तौर पर 12-16 प्रतिशत प्रति वर्ष के आसपास है, जो मुद्रास्फीति से बहुत अधिक है।विभाग के अनुसार, मुद्रास्फीति के लिए ‘इंडेक्सेशन’चार से पांच प्रतिशत के आसपास है, जो संपत्ति को कितने समय के लिए अपने पास रखा गया उस अवधि पर निर्भर करता है। इसलिए, ऐसे करदाताओं में से अधिकतर को पर्याप्त कर बचत की उम्मीद है।अचल संपत्ति की अवधि के आधार पर लाभों की तुलना करते हुए आयकर विभाग ने कहा कि बिना ‘इंडेक्सेशन’ के नई कर दर अधिकतर मामलों में लाभकारी है।

नई व्यवस्था कब फायदेमंद

पांच वर्षों तक रखी गई संपत्ति के लिए नई व्यवस्था तब लाभकारी होगी जब संपत्ति का मूल्य 1.7 गुना या उससे अधिक बढ़ गया हो, जबकि 10 वर्षों तक रखी गई संपत्ति के लिए यह तब लाभकारी होगी जब मूल्य 2.4 गुना या उससे अधिक बढ़ गया हो। 2009-10 में खरीदी गई संपत्ति के लिए यदि मूल्य 4.9 गुना या उससे अधिक बढ़ गया है तो यह फायदेमंद होगा।

आयकर विभाग ने कहा, कि उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि केवल उन क्षेत्रों में, जहां रिटर्न कम है (करीब 9-11 प्रतिशत प्रति वर्ष से कम), वहां पहले की कर दर लाभदायक है, लेकिन रियल एस्टेट में इतना कम रिटर्न अवास्तविक तथा दुर्लभ है। वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में लाए गए बदलावों के अनुसार, सरकार ने 2001 से पहले खरीदी गई या विरासत में मिली संपत्तियों पर करदाताओं के लिए ‘इंडेक्सेशन’ लाभ बरकरार रखा है। कर की दर में बदलाव 23 जुलाई 2024 से प्रभावी हो गए हैं।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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