Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026‑27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Sovereign Gold Bonds (SGBs) से जुड़े टैक्स नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिससे इन निवेश उपकरणों पर पहले की तरह सभी निवेशकों को मिलने वाला कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) छूट लाभ अब सीमित हो गया है।
सबको नहीं मिलेगा फायदा
पहले SGBs पर ब्याज के अलावा जो भी लाभ निवेशकों को मिलता था, वह मैच्योरिटी पर टैक्स‑फ्री (Tax‑Free) होता था, चाहे उन्होंने बॉन्ड को RBI से खरीदा हो या बाद में सेकेंडरी बाजार (स्टॉक एक्सचेंज) से ले लिया हो। लेकिन अब बजट के नए प्रस्ताव के अनुसार यह नियमन सख्त कर दिया गया है।
इन निवेशकों को मिलेगा लाभ
नया नियम यह कहता है कि केवल वे निवेशक, जिन्होंने SGBs को RBI से जारी होने के समय सीधे खरीदा और उसे पूरी अवधि (साधारणतः 8 वर्ष) तक रखा हो वही कैपिटल गेन (Capital Gain) पर टैक्स‑फ्री छूट का लाभ प्राप्त करेंगे। अगर कोई निवेशक सेकेंडरी बाजार से SGB खरीदता है या समय से पहले बेचता है, तो उसे मुनाफे (Difference between purchase price and redemption value) पर Capital Gains Tax देना होगा।
लॉन्ग‑टर्म निवेशकों को प्रोत्साहन
इस बदलाव का उद्देश्य सरकार की ओर से यह सुनिश्चित करना है कि टैक्स‑फ्री बेनिफिट केवल उन लोगों को मिले, जो मूल रूप से निवेश के उद्देश्य से SGB में पूंजी लगाए हैं, न कि वे निवेशक जो छूट का फायदा उठाकर बाजार से सस्ते दामों पर बॉन्ड खरीदते और मैच्योरिटी पर टैक्स‑फ्री बेनिफिट पाते थे। इस प्रकार सरकार अनुकूल निवेश और सच्चे लॉन्ग‑टर्म निवेशकों को प्रोत्साहित करना चाहती है और ऐसे अवसर, जहां निवेशक कम दाम पर खरीदकर टैक्स‑फ्री लाभ उठाते थे, को समाप्त करना चाहती है।
इन्हें देना होगा कैपिटल गेन टैक्स
इस बदलाव का प्रभाव यह होगा कि अब SGBs को सेकेंडरी मार्केट में खरीदने वाले निवेशकों को भी कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ेगा, जिससे यह पहले की तुलना में अब कम टैक्स‑फ्री निवेश विकल्प रहेगा, जब तक कि निवेशक उसे RBI से जारी होने पर नहीं खरीदता और मैच्योरिटी तक नहीं रुकता।
